Datia By Election: दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा कर दी है. कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने एक कड़े मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को लगभग 6,000 वोटों से शिकस्त दी है. घनश्याम सिंह ने शुरुआती दौर से ही बढ़त बनाए रखी और अंततः जीत का परचम लहराया.
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नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना पड़ा भारी?
जीत-हार के नतीजों के बाद MP Tak की टीम ने दतिया की जनता से उनके विचार जाने. ग्राउंड जीरो से सामने आई प्रतिक्रियाओं में एक बात सबसे प्रमुख रूप से उभरी- पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटा जाना.
स्थानीय निवासियों का कहना है कि नरोत्तम मिश्रा दतिया का बड़ा चेहरा रहे हैं और क्षेत्र में विकास कार्यों (जैसे सड़कें, कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाएं) के लिए जाने जाते थे. जब भाजपा ने उनका टिकट काटकर एक नए चेहरे आशुतोष तिवारी को मैदान में उतारा, तो उससे स्थानीय कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भारी नाराजगी फैल गई.
जनता की जुबानी: क्यों हारी भाजपा?
- नारजगी और सहानुभूति: स्थानीय लोगों के अनुसार, मंच पर नरोत्तम मिश्रा के भावुक होने और उनका टिकट कटने की घटना ने जनता के मन में गहरा असर डाला.
- नए चेहरे से दूरी: लोगों का मानना है कि आशुतोष तिवारी एक नया चेहरा थे और जनता के बीच नरोत्तम मिश्रा जितनी उनकी पकड़ या पहचान नहीं थी.
- विकास का मुद्दा: कई स्थानीय युवाओं और बुजुर्गों का कहना था कि नरोत्तम मिश्रा के समय काम तुरंत होते थे, और उनका टिकट काटना भाजपा के लिए आत्मघाती साबित हुआ.
सियासी समीकरणों पर असर
2023 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद इस उपचुनाव में नरोत्तम मिश्रा का पत्ता कट जाना और फिर भाजपा की इस सीट पर हार होना, पार्टी के केंद्रीय व प्रादेशिक नेतृत्व के लिए आत्ममंथन का विषय है. कांग्रेस के लिए यह जीत बुंदेलखंड अंचल में संजीवनी की तरह देखी जा रही है, जबकि भाजपा को यह हार आगे के राजनीतिक समीकरणों में चुभ सकती है.
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