दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने मध्य प्रदेश की भावी राजनीति का नया संकेत दे दिया है. मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और संगठन की पूरी ताकत झोंकने के बावजूद भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस सीट पर अपनी साख नहीं बचा सकी. कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने बीजेपी के आशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों के अंतर से शिकस्त देकर सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रखा.
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इस हार ने बीजेपी के चुनावी प्रबंधन और बूथ रणनीति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि कांग्रेस की आंतरिक गुटबाजी को साधने की कोशिश रंग लाती दिख रही है.
1. बीजेपी की 'किलाबंदी' फेल, मंत्रियों-विधायकों का नहीं चला जादू
- बीजेपी ने दतिया उपचुनाव को पूरी तरह प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया था.
- पार्टी ने पूरे क्षेत्र के 291 बूथों को 20 शक्ति केंद्रों में बांटा था और हर एक केंद्र की कमान एक-एक विधायक को सौंपी गई थी.
- इसके अलावा 8 मंत्रियों ने क्षेत्र में लगातार तूफानी दौरे और जनसंपर्क किया.
बावजूद इसके, विधायक बूथ स्तर पर बीजेपी के पक्ष में माहौल बनाने में नाकाम रहे और मंत्रियों की भारी-भरकम मौजूदगी भी चुनावी समीकरणों को बदलने में असफल रही.
2. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना पड़ा भारी?
स्थानीय मतदाताओं और राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता नरोत्तम मिश्रा का टिकट काटा जाना पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण बना. स्थानीय लोगों के मुताबिक, क्षेत्र में नरोत्तम मिश्रा का मजबूत जनाधार था और उनका टिकट कटने से समर्थकों व वोटरों में अंदरूनी नाराजगी थी. मतदाता यह मानते दिखे कि जनता बीजेपी से ज्यादा नरोत्तम मिश्रा से जुड़ी थी, जिसका सीधा नुकसान बीजेपी प्रत्याशी आशुतोष तिवारी को उठाना पड़ा.
3. कांग्रेस की वो रणनीति जो जीत में बदली
कांग्रेस ने इस उपचुनाव को बेहद अनुशासित और रणनीतिक तरीके से लड़ा:
गुटबाजी पर पाया काबू: घनश्याम सिंह को टिकट मिलने के बाद पार्टी के स्थानीय नेता अवधेश नायक नाराज चल रहे थे. लेकिन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी खुद अवधेश नायक के घर पहुंचे और भोपाल के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हें मना लिया. बीजेपी ने अवधेश नायक को साधने की कोशिश की, लेकिन कांग्रेस उन्हें अपने पाले में बनाए रखने में सफल रही.
भीतरघात की आहट को दबाया: चुनाव प्रचार के दौरान पार्टी ने दूसरे गुट (राजेंद्र भारती) की नाराजगी को खुलकर सामने नहीं आने दिया. हालांकि, नतीजे आने से ठीक कुछ घंटे पहले राजेंद्र भारती को निष्कासित जरूर किया गया, पर पूरे चुनाव के दौरान एकजुटता का संदेश बना रहा.
2028 विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस को मिला 'बूस्टर डोज'
जीत दर्ज करने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने प्रदेश के कार्यकर्ताओं और जनता का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि दतिया की जीत से पूरे मध्य प्रदेश के कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है और पार्टी 2028 के आगामी विधानसभा चुनाव में पूरी मजबूती के साथ प्रदेश में वापसी करेगी.
कांग्रेस अब इस नतीजे को प्रदेश सरकार के खिलाफ बढ़ते असंतोष (एंटी-इन्कंबेंसी) के रूप में पेश कर रही है, वहीं बीजेपी के लिए यह हार अपनी सांगठनिक रणनीति पर आत्ममंथन करने का बड़ा कारण बन गई है.
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