मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव से ठीक पहले सियासी पारा अचानक गर्म हो गया है. यहां बीजेपी और कांग्रेस के बीच चुनावी जंग तो तेज थी ही, लेकिन अब कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह की उम्मीदवारी पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं. दतिया स्टेट के महाराज गोविंद राहुल देव सिंह ने घनश्याम सिंह पर चुनावी हलफनामे में अपनी संपत्ति की जानकारी छिपाने का संगीन आरोप लगाया है. इस संबंध में उन्होंने कलेक्टर और जिला निर्वाचन अधिकारी के पास लिखित शिकायत भी दर्ज कराई है.
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क्या है पूरा मामला?
दतिया स्टेट के महाराज गोविंद राहुल देव सिंह ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने अपने नामांकन पत्र (एफिडेविट) में अपनी पूरी संपत्ति की सही और स्पष्ट जानकारी नहीं दी है.
राहुल देव सिंह ने शिकायत के बाद मीडिया से बात करते हुए कहा:
"घनश्याम सिंह ने जो हलफनामा दिया है, उसमें कई चीजें गलत तरीके से पेश की गई हैं. उन्होंने हिंदू अनडिवाइडेड फैमिली (HUF) की संपत्ति का जिक्र किया है, लेकिन यह नहीं बताया कि वह संपत्ति उन्हें कहां से और कैसे मिली. एक तरफ वह कहते हैं कि यह स्वअर्जित संपत्ति है, तो दूसरी तरफ उसे भाइयों में बांटने की बात करते हैं. यही नहीं, उन्होंने अपने ही भाई के परिवार की जानकारी छिपाकर उनके अधिकारों का हनन किया है."
उन्होंने आगे कहा कि वह एक आम नागरिक की हैसियत से अपने और अपने परिवार के अधिकारों की रक्षा के लिए यह गुहार लगा रहे हैं और जल्द ही इस मामले की शिकायत सीधे केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ECI) से भी करेंगे.
बीजेपी की तैयारियां भी तेज
इस बड़े सियासी ड्रामे के बीच बीजेपी भी दतिया में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है. पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की अगुवाई में बीजेपी ने दतिया उपचुनाव के लिए 32 सदस्यीय चुनाव संचालन समिति का गठन कर दिया है. बीजेपी के वरिष्ठ नेता लगातार दतिया में बैठकें कर रहे हैं और जमीनी पकड़ मजबूत करने में जुटे हैं.
क्या रद्द हो जाएगा नामांकन? चर्चा में मीनाक्षी नटराजन का मामला
घनश्याम सिंह के खिलाफ संपत्ति छिपाने की शिकायत दर्ज होने के बाद राजनीतिक गलियारों में कयासों का दौर शुरू हो गया है. लोग इस मामले की तुलना मध्य प्रदेश की राजनीति के उस चर्चित वाकये से कर रहे हैं जब कांग्रेस की कद्दावर नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तकनीकी कारणों और शिकायतों के चलते रद्द होने की चर्चा खूब सुर्खियों में रही थी. हालांकि, घनश्याम सिंह के नामांकन पर अभी तक निर्वाचन अधिकारी की तरफ से कोई अंतिम फैसला या आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है. अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन और चुनाव आयोग इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है.
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