दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह से मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने जिले में नए राजनीतिक व सामाजिक समीकरण साधने शुरू कर दिए हैं. उपचुनाव में पराजय के तुरंत बाद बीजेपी शीर्ष नेतृत्व ने दतिया की पूरी जिला कार्यकारिणी और मोर्चों को भंग कर दिया है. हालांकि, पार्टी ने किसी भी बड़े नेता पर निलंबन की सीधी कार्रवाई न करके सामूहिक बदलाव और पुनर्गठन का संकेत दिया है.
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नए जिला अध्यक्ष के लिए नरोत्तम विरोधी खेमे की चर्चाएं तेज
सूत्रों के मुताबिक, दतिया में पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों को संगठन के प्रमुख पदों से दूर रखने की रणनीति बनाई जा रही है. जिला अध्यक्ष पद के लिए मुख्य रूप से दो प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं.
आशुतोष तिवारी: उपचुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी रहे आशुतोष तिवारी को अगर जिला अध्यक्ष की कमान मिलती है, तो पार्टी नरोत्तम मिश्रा के बाद ब्राह्मण और व्यापारी वर्ग के समीकरणों को साधने की कोशिश करेगी.
घनश्याम पिरोनिया: पूर्व विधायक और प्रदेश प्रवक्ता घनश्याम पिरोनिया के जरिए पार्टी दलित वोट बैंक में अपनी पैठ दोबारा मजबूत करने का प्रयास कर सकती है.
पूर्व जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा ने जताई नाराजगी
जिला कार्यकारिणी भंग होने और पद से हटाए जाने के बाद पूर्व जिला अध्यक्ष रघुवीर कुशवाहा ने अपनी पीड़ा व्यक्त की है. उन्होंने कहा कि उन्होंने और अन्य कार्यकर्ताओं ने पूरी निष्ठा से प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में काम किया.
"यदि किसी ने भीतरघात किया था तो समीक्षा करके उसके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी. बिना सबूत के इस तरह पूरी कार्यकारिणी भंग करके हजारों निष्ठावान कार्यकर्ताओं को हतोत्साहित करना उचित नहीं है."
2028 विधानसभा और आगामी निकाय चुनाव पर नजर
बीजेपी आगामी नगरीय निकाय चुनावों और 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले दतिया में गुटीय खींचतान को खत्म करना चाहती है. कुशवाहा समाज, दलित वर्ग और ब्राह्मण वर्ग को एक साथ साधने के उद्देश्य से पार्टी नेतृत्व जल्द ही नए जिला अध्यक्ष की घोषणा कर सकता है.
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