देवास/इंदौर:
मध्य प्रदेश के देवास और इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक को अंजाम दिया है. खाकी की आड़ में अकूत साम्राज्य खड़ा करने वाले पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) इंदौर के प्रधान आरक्षक (चालक) फिरोज खान के ठिकानों पर जब लोकायुक्त की टीम पहुंची, तो अधिकारी भी बरामद संपत्तियों का ब्योरा देखकर दंग रह गए.
ADVERTISEMENT
मंगलवार सुबह ठीक 6 बजे लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीमों ने एक साथ फिरोज खान के देवास स्थित मकान समेत 15 अलग-अलग ठिकानों पर दबिश दी. सुबह से शुरू हुई यह कार्रवाई देर शाम तक चलती रही.
गणित देखकर उड़े अफसरों के होश: आय से 11 करोड़ ज्यादा खर्च
लोकायुक्त की प्राथमिक जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, उन्होंने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं:
- वैध आय: लगभग ₹1,93,84,000 (1 करोड़ 93 लाख रुपये)
- कुल पाया गया खर्च: लगभग ₹12,95,72,000 (12 करोड़ 95 लाख रुपये)
- आय से अधिक खर्च: लगभग ₹11,01,87,000 (11 करोड़ 1 लाख रुपये से अधिक)
- 33 अचल संपत्तियां: बाजार मूल्य लगभग ₹30 करोड़
जांच में अब तक 33 अचल संपत्तियों (मकान, दुकान और कृषि भूमि) का खुलासा हुआ है. सरकारी कागजों में इन जमीनों की खरीद पर ₹11.57 करोड़ खर्च दर्शाए गए हैं, जबकि वर्तमान में इनका बाजार मूल्य लगभग ₹29.73 करोड़ आंका जा रहा है. चौंकाने वाली बात यह है कि ये संपत्तियां फिरोज ने न केवल अपने नाम पर, बल्कि परिजनों, एक परिचित महिला और अपनी विभिन्न फर्जी फर्मों के नाम पर ले रखी थीं.
लोकायुक्त की रेड में क्या-क्या मिला?
- 9 लग्जरी वाहन: बेड़े में ट्रक, कार, स्कॉर्पियो, स्कूटी और मोटरसाइकिलें शामिल हैं.
- 21 बैंक खाते: इंदौर, उज्जैन और देवास के विभिन्न बैंकों में मिले 21 बैंक खातों को फिलहाल फ्रीज (Freeze) कर दिया गया है.
- 5 फर्जी/संदिग्ध फर्में: काली कमाई को खपाने के लिए बनाई गईं कंपनियों का पता चला है, जिनमें 'साहिल ट्रेडिंग कंपनी', 'रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट', 'रोशनी सेल्स एंड सर्विस', 'महाराजा रियल एस्टेट' और 'ब्लैक हॉरनेट' शामिल हैं.
- 21.75 बीघा जमीन का एग्रीमेंट: इंदौर की एक महिला (रोशनी वर्मा) के नाम पर रजिस्टर्ड 21.75 बीघा कृषि भूमि का एग्रीमेंट भी बरामद हुआ है.
अफसरों की 'करीबी' से बनाया रसूख का साम्राज्य
फिरोज खान पिछले दो दशकों से अधिक समय से पुलिस विभाग में तैनात है. उसके पिता भी पुलिस सेवा में रहे हैं. पुलिस में भर्ती होने के बाद फिरोज लगातार बड़े पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां चलाने लगा. वरिष्ठ अफसरों का खास और करीबी बनने के बाद उसने अपने इसी रसूख का इस्तेमाल अवैध कमाई और जमीनों के कारोबार में करना शुरू कर दिया.
जांच जारी: बड़े चेहरों पर भी उठ रहे सवाल
देवास और इंदौर के कुछ चुनिंदा ठिकानों पर लोकायुक्त की सर्च कार्रवाई अभी भी जारी है, जबकि कई जगहों से मिले दस्तावेजों की जांच पूरी हो चुकी है. एक मामूली पद (ड्राइवर) पर रहते हुए करोड़ों रुपये का यह साम्राज्य कैसे खड़ा हुआ और इसके पीछे कौन-कौन से बड़े नाम शामिल हैं. लोकायुक्त पुलिस अब इन सभी सवालों की कड़ियां जोड़ने में जुटी है.
ADVERTISEMENT


