नीट परीक्षा (NEET Exam) और उसमें हुए पेपर लीक के घमासान के बीच एक बड़ी खबर ने देशभर के छात्रों को राहत दी है. लंबे समय से चल रहे विरोध-प्रदर्शनों और छात्रों के आक्रोश के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. जैसे ही यह खबर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कोचिंग कर रहे युवाओं तक पहुंची, उनके चेहरों पर एक अलग ही सुकून और जीत की खुशी देखने को मिली.
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करीब महीने भर से भी ज्यादा समय (36 दिन) तक छात्र सड़क पर उतरे हुए थे. जंतर-मंतर से लेकर भोपाल, इंदौर, दिल्ली और बिहार के कई कोनों में युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की थी. ऐसे में मंत्री के इस्तीफे को छात्र अपनी एक बड़ी नैतिक जीत के तौर पर देख रहे हैं.
भोपाल के MP नगर में छात्रों ने क्या कहा?
भोपाल के कोचिंग हब माने जाने वाले MP नगर में जब हमने पढ़ाई कर रहे युवाओं से बात की, तो उन्होंने बड़े ही बेबाक अंदाज में अपनी बात रखी:
- एक छात्र का कहना था कि गलतियां इंसान से ही होती हैं, लेकिन जब हर दूसरी परीक्षा में पेपर लीक होने लगे तो बात सिर्फ गलती की नहीं रह जाती. एक लोकतांत्रिक देश में सरकार और उसके नेताओं को जनता के प्रति जवाबदेह होना ही पड़ेगा. अगर शिक्षा मंत्री ने नैतिकता के आधार पर इस्तीफा दिया है, तो यह एक स्वागत योग्य कदम है.
- कई छात्रों का मानना है कि सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के हट जाने से व्यवस्था रातों-रात नहीं बदल जाएगी. असली गड़बड़ी उस सरकारी मशीनरी और निचले स्टाफ में है जो बरसों से वहां जमे हुए हैं. जब तक पेपर लीक कराने वाले माफियाओं और भ्रष्ट अफसरों पर गाज नहीं गिरेगी, तब तक छात्र पूरी तरह सुरक्षित महसूस नहीं करेंगे.
ट्रेन ड्राइवर की तरह शिक्षा व्यवस्था में भी चाहिए जीरो टॉलरेंस
एक युवा ने बड़ा ही सटीक उदाहरण देते हुए कहा, "जैसे ट्रेन चलाने वाला ड्राइवर अगर लापरवाही करे तो हजारों लोगों की जान जा सकती है, ठीक वैसे ही शिक्षा प्रणाली में एक छोटी सी लापरवाही लाखों बच्चों और उनके परिवारों के सपनों को चकनाचूर कर देती है. एक बच्चा जब साल-दो साल मेहनत करता है, तो उसके साथ पूरा परिवार पसीना बहाता है. इसलिए इस व्यवस्था में 0% टॉलरेंस वाली सख्ती बेहद जरूरी है."
NEET ही क्यों, SSC और बाकी परीक्षाओं का क्या?
छात्रों ने यह भी साफ किया कि गुस्सा सिर्फ नीट को लेकर नहीं है. कर्मचारी चयन आयोग (SSC) से लेकर अलग-अलग राज्यों की भर्ती परीक्षाओं में जिस तरह की धांधली और लेती-लतीफी होती है, उससे लाखों युवाओं की उम्र निकल रही है. युवाओं का कहना है कि सरकार को अब एक ऐसा मजबूत और सख्त कानून लाना चाहिए जिससे आगे कभी कोई पेपर लीक करने की हिम्मत न जुटा सके. भोपाल के युवाओं का संदेश साफ है धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा एक अच्छी शुरुआत है, लेकिन असली जश्न तब मनाया जाएगा जब देश की पूरी परीक्षा प्रणाली पारदर्शी और निष्पक्ष बन जाएगी.
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