MP के पूर्व सीएम कमलनाथ की 26 बीघा जमीन के साथ यूपी में 'खेला' हो गया !

प्राची अवस्थी

• 02:02 PM • 02 Oct 2026

मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम कमलनाथ की यूपी के बिजनौर में मौजूद 26 बीघा पैतृक जमीन हड़पने की साजिश का भंडाफोड़. फर्जी डेथ सर्टिफिकेट और वसीयत बनाकर रची गई धोखाधड़ी.

MP के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ
MP के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ
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भू-माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे राज्य के आम नागरिकों को ही नहीं, बल्कि देश के बड़े नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों की संपत्ति पर भी डाका डालने से बाज नहीं आ रहे.ताजा मामला उत्तर प्रदेश के बिजनौर से सामने आया है, जहां मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता कमलनाथ के पिता की पैतृक जमीन पर कब्जा करने की एक बड़ी साजिश का पर्दाफाश हुआ है.

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अधिकारियों ने पिता का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट और फर्जी वसीयत तैयार कर 26 बीघा जमीन हड़पने की कोशिश की थी. हालांकि, समय रहते साजिश पकड़ी गई और पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है.

90 बीघा पैतृक जमीन पर थी भू-माफियाओं की नजर

पूरा मामला बिजनौर जिले की नजीबाबाद तहसील के गांव अमीखानपुर का है. यहां गाटा संख्या 429 में मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पिता स्वर्गीय महेंद्रनाथ की लगभग 90 बीघा पैतृक जमीन दर्ज है. यह जमीन सालों से बटाई पर चल रही थी और काफी समय से परिवार के किसी सदस्य का यहां आना-जाना नहीं हुआ था. इसी बात का फायदा उठाकर स्थानीय भू-माफियाओं ने सरकारी तंत्र की मिलीभगत से 26 बीघा हिस्से पर अवैध कब्जे का ताना-बाना बुन लिया.

विरासत दर्ज कराने के आवेदन से खुला राज

साजिश का पर्दाफाश तब हुआ जब 18 मई 2026 को कमलनाथ ने अपनी इस पैतृक जमीन पर विरासत दर्ज कराने के लिए तहसील में आधिकारिक आवेदन दिया. आवेदन प्रक्रिया के दौरान संबंधित हल्का लेखपाल डेविड कुमार ने जमीन को विवादित बताते हुए रिपोर्ट तहसीलदार के पास भेज दी.मामले की जब गहराई से जांच की गई तो पता चला कि तहसीलदार कोर्ट में पहले से ही 'धर्मपाल बनाम ग्राम सभा' नाम से एक फर्जी मुकदमा चल रहा था

इस फर्जी मुकदमे में दो मुख्य जालसाजी की गई थीं . 7 अक्टूबर 1998 की एक फर्जी वसीयत लगाई गई थी. नजीबाबाद तहसील से जारी 10 अप्रैल 2003 का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट लगाया गया था.जबकि हकीकत यह है कि कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ का निधन 7 सितंबर 2004 को नई दिल्ली में हुआ था. फर्जीवाड़े का सबूत मिलते ही प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया.

पुलिस का कड़ा एक्शन, 2 गिरफ्तार और सरकारी लेखपाल फरार

मामले की गंभीरता को देखते हुए 30 सितंबर 2026 को नजीबाबाद थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत धोखाधड़ी, जालसाजी और कूटरचित दस्तावेज तैयार करने का मुकदमा दर्ज किया गया.बिजनौर पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए अगले ही दिन, 1 अक्टूबर को मामले में त्वरित कार्रवाई की और दो मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया. धर्मपाल सिंह (मुख्य आरोपी, जिसने जमीन पर दावा किया था)विजय शंकर पांडेय (फर्जी वसीयत टाइप करने वाला आरोपी) इस पूरे फर्जीवाड़े में सरकारी तंत्र की भूमिका भी उजागर हुई है। साजिश में शामिल हल्का लेखपाल डेविड कुमार और जसबिंदर सिंह ढिल्लो फिलहाल फरार हैं, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस की कई टीमें लगातार दबिश दे रही हैं.

एसपी केके बिश्नोई,बिजनौर का बयान और आगे की कानूनी प्रक्रिया

मामले की जानकारी देते हुए

बिजनौर के एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि फर्जीवाड़े की सूचना मिलते ही एफआईआर दर्ज कर मुख्य आरोपियों को जेल भेज दिया गया है. अन्य नामजद आरोपियों और पर्दे के पीछे शामिल लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है

 

फिलहाल, पुलिस और राजस्व प्रशासन फर्जी दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराने के साथ-साथ 90 बीघा जमीन का राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करने में जुट गया है, ताकि कमलनाथ के परिवार को उनकी पैतृक संपत्ति का मालिकाना हक विधिवत वापस दिलाया जा सके.