इंदौर का भंवरकुआं बना 'जंतर-मंतर, NEET पेपर लीक के खिलाफ 24 दिनों से डटे 5000 छात्र, केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग अड़ी

न्यूज तक डेस्क

• 08:51 AM • 25 Jul 2026

NEET पेपर लीक मामले में इंदौर का भंवरकुआं इलाका 24 दिनों से आंदोलन का केंद्र बना हुआ है, जहां 5,000 से अधिक छात्र और अभिभावक डटे हैं. प्रदर्शनकारी छात्र शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग पर अड़े हुए हैं.

Indore में 'जंतर-मंतर' जैसा प्रोटेस्ट
Indore में 'जंतर-मंतर' जैसा प्रोटेस्ट
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मध्य प्रदेश की आर्थिक और शैक्षणिक राजधानी इंदौर का भंवरकुआं इलाका इन दिनों छात्रों के भारी आक्रोश और इंसाफ के नारों से गूंज रहा है. NEET (नीट) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक मामले को लेकर उठा विरोध अब 24वें दिन एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है. भीषण गर्मी और मूसलाधार बारिश के बावजूद टांटिया भील चौराहे पर 5,000 से अधिक छात्र, शिक्षक और उनके अभिभावक लगातार डटे हुए हैं.

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30 जून को शुरू हुआ आंदोलन अब बना 'जन सैलाब'

30 जून को कुछ छात्रों से शुरू हुआ यह सत्याग्रह अब व्यापक समर्थन हासिल कर चुका है. भंवरकुआं फ्लाईओवर के नीचे दिन-रात छात्रों का जमावड़ा लगा रहता है. रात के समय एक जत्था विश्राम के लिए जाता है, तो दूसरा जत्था तुरंत माइक संभालकर मोर्चा थाम लेता है. कोचिंग क्लास समाप्त होने के बाद छात्र हॉस्टल या घर लौटने के बजाय सीधे आंदोलन स्थल पर पहुंचकर अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं.

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

  • शिक्षा मंत्री का इस्तीफा: प्रदर्शनकारी छात्रों की मुख्य मांग है कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपने पद से तुरंत इस्तीफा दें.
  • जवाबदेही और सख्त कार्रवाई: पेपर लीक के मुख्य दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए और पूरे एजुकेशन सिस्टम में पारदर्शिता व जवाबदेही तय की जाए.

मुंबई से पहुंचे अभिभावक और राजनीतिक समर्थन

आंदोलन में केवल छात्र ही नहीं बल्कि देश के अन्य हिस्सों से अभिभावक और सामाजिक कार्यकर्ता भी पहुंच रहे हैं. मुंबई से आए अभिभावकों का कहना है कि वे बच्चों का हौसला बढ़ाने और व्यवस्था में बदलाव के लिए यहां पहुंचे हैं.

वहीं इस आंदोलन को मध्य प्रदेश में भारी राजनीतिक समर्थन मिल रहा है:

  • कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह और जीतू पटवारी ने मंच पर पहुंचकर छात्रों को अपना समर्थन दिया.
  • जयस (JAYS) और आम आदमी पार्टी जैसे संगठन भी छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं.
  • इंदौर के अलावा भोपाल, सतना, बड़वानी, मैहर, श्योपुर और जबलपुर जैसे शहरों में भी छात्रों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखने लगा है.

पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

मीडिया रिपोर्ट्स और स्थानीय नेताओं के अनुसार, प्रशासन आंदोलन को दबाने का प्रयास कर रहा है. आरोप हैं कि आंदोलनकारी छात्रों तक खाना और पानी पहुंचाने वाले लोगों को पुलिस द्वारा परेशान किया जा रहा है. इस पर कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि छात्रों के इस शांतिपूर्ण आंदोलन में रुकावट न डाली जाए.

दिल्ली में वार्ता और आगे का रुख

दिल्ली में भी छात्र संगठनों (CJP) और सरकार के बीच बैठकों का दौर जारी है. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई वार्ता में दो मांगों पर सहमति जरूर बनी, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर पेंच फंसा हुआ है. छात्रों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, इंदौर से लेकर दिल्ली तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा.