Latabai Death Case Indore: मध्य प्रदेश के इंदौर से रिश्तों को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है. यहां चार बेटों के होते हुए भी एक बुजुर्ग मां के शव को तीन दिन तक अंतिम संस्कार का इंतजार करना पड़ा. आरोप है कि बेटों ने मां का अंतिम संस्कार करने और मुखाग्नि देने से इनकार कर दिया. इसके बाद समाजसेवियों ने आगे आकर महिला का अंतिम संस्कार किया. मामला इंदौर के सिलिकॉन सिटी स्थित गणेश रेजिडेंसी का है. यहां रहने वाली 60 वर्षीय लताबाई की 13 सितंबर को एक वृद्धाश्रम में इलाज के दौरान मौत हो गई थी. इसके बाद उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए परिजनों का इंतजार रहा. परिजनों की ओर से अंतिम संस्कार को लेकर कथित तौर पर सहमति नहीं बनने के बाद मामला तीन दिनों तक अटका रहा. आखिरकार समाजसेवियों ने जिम्मेदारी उठाई और लताबाई का अंतिम संस्कार किया.
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जमा पूंजी बेचकर खरीदा था फ्लैट, बेटों ने नाम कराकर सड़क पर फेंका
जानकारी के मुताबिक, लताबाई ने अपने जीवन भर की जमा पूंजी और गहने बेचकर गणेश रेजिडेंसी में एक फ्लैट खरीदा था. हालांकि, संपत्ति हाथ में आते ही चारों बेटों ने छल से वह फ्लैट अपने नाम करवा लिया और वृद्ध मां को बेघर कर सड़क पर छोड़ दिया. घर से निकाले जाने के बाद लताबाई असहाय स्थिति में भटक रही थीं. इसके बाद समाजसेवी संस्था 'परवाह फाउंडेशन' के अजय नागदा ने उन्हें अपने वृद्धाश्रम में सहारा दिया और उनकी देखरेख शुरू की.
अस्पताल में तड़पती रही मां, बेटों ने एक-दूसरे पर टाली जिम्मेदारी
लताबाई लंबे समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रही थीं. जब उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो उन्हें इंदौर के एमवाय अस्पताल में भर्ती कराया गया. आश्रम संचालकों ने चारों बेटों को फोन कर मां की गंभीर हालत की सूचना दी, लेकिन बेटों ने एक-दूसरे पर जिम्मेदारी टालना शुरू कर दिया. कोई कहता कि छोटा बेटा आएगा तो कोई बड़े बेटे के आने की बात कहता, लेकिन कोई भी मां का हाल-चाल पूछने अस्पताल नहीं पहुंचा.
मौन हुई सांसें तो बोले- 'आप ही कर दो अंतिम संस्कार, ऑनलाइन पैसे भेज देंगे'
इस बीच 13 सितंबर को अस्पताल में इलाज के दौरान लताबाई ने दम तोड़ दिया. दावा है कि जब उनके बड़े बेटे और अन्य भाइयों को मां के देहांत की खबर दी गई और शव लेकर अंतिम संस्कार करने को कहा गया तो आरोप है कि उन्होंने साफ मना कर दिया. बेटों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार करते हुए आश्रम संचालकों से कहा कि वे इंदौर नहीं आ सकते. आप ही विधि-विधान से अंतिम संस्कार कर दीजिए, जो भी खर्चा आएगा, वह हम आपको ऑनलाइन ट्रांसफर कर देंगे.
समाजसेवियों ने निभाया फर्ज, समाज में उठे गंभीर सवाल
बेटों के इस अमानवीय रवैये के बाद परवाह फाउंडेशन और स्थानीय समाजसेवियों ने मिलकर हिंदू रीति-रिवाज से लताबाई का अंतिम संस्कार किया. इंदौर और भोपाल से पहले भी इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं, जहां औलाद ने मां-बाप की संपत्ति हड़पने के बाद उनकी मौत पर केवल ऑनलाइन पैसे भेजने की बात कही. यह घटना न सिर्फ मध्य प्रदेश को झकझोरती है, बल्कि इस बात पर भी सोचने को मजबूर करती है कि हमारा समाज किस ओर जा रहा है.
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