इंदौर में एमबीए छात्रा की हत्या के मामले में गिरफ्तार आरोपी पीयूष को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. जिस पीयूष ने कानून को अपने हाथ में लेकर एक छात्रा की जान ली, वह कभी खुद खाकी वर्दी पहनने और बड़ा पुलिस अफसर बनने का ख्वाब देखता था. आरोपी के पिता ने खुलासा किया है कि पीयूष आईपीएस (IPS) बनने की सलाह लेने के लिए मंदसौर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (SP) से भी मिलने पहुंचा था.
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आईपीएस बनने की सलाह लेने पहुंचा था एसपी के पास
आरोपी पीयूष के पिता ने बताया कि उनके बेटे के सिर पर पुलिस अधिकारी बनने का ऐसा जुनून सवार था कि वह अपनी पढ़ाई और करियर को लेकर अक्सर पुलिस अफसरों से मिलना चाहता था. पिता के अनुसार, करीब दो साल पहले पीयूष मंदसौर एसपी के पास गया था. वहां उसने एसपी साहब से मुलाकात की और उनसे पूछा था कि 'साहब, मुझे आईपीएस बनना है, इसके लिए मुझे क्या करना चाहिए और कैसी तैयारी करनी चाहिए?' उस समय एसपी ने उसे करियर पर फोकस करने और मन लगाकर पढ़ाई करने की नसीहत दी थी.
दिल्ली भी गया था तैयारी करने, लेकिन मन नहीं लगा
पिता ने बताया कि आईपीएस बनने के सपने को पूरा करने के लिए पीयूष करीब तीन साल पहले दिल्ली भी गया था. परिवार को उम्मीद थी कि वह वहां रहकर कड़ी मेहनत करेगा और एक दिन बड़ा अफसर बनकर लौटेगा. लेकिन दिल्ली पहुंचने के महज एक-दो दिन बाद ही उसे वहां कुछ समझ नहीं आया और वह दिल्ली रेलवे स्टेशन से ही वापस घर लौट आया था. पिता के मुताबिक, पीयूष को लगता था कि वह उतनी कड़ी पढ़ाई शायद नहीं कर पाएगा, लेकिन पुलिस अफसर बनने की उसकी चाहत हमेशा बनी रही.
'वर्दी पहनने की चाहत रखने वाला आज जेल की सलाखों के पीछे'
पीयूष के पिता इस बात से सबसे ज्यादा आहत हैं कि जो बेटा कभी आईपीएस बनकर समाज की सेवा करने की बातें करता था, आज उसने ऐसा जघन्य अपराध किया है कि उसे समाज में सिर उठाकर चलने लायक नहीं छोड़ा. उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि वर्दी पहनने का सपना देखने वाले ने आज खुद के दामन पर ऐसा दाग लगा लिया है जिसे शाही की तरह मिटाया नहीं जा सकता. पिता ने दो टूक शब्दों में कहा कि पीयूष को उसके इस 'जघन्य अपराध' के लिए कानून के मुताबिक कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए.
समाज से मांगी माफी, बोले- 'बेटे ने दे दिया पीढ़ियों का कलंक'
एमपी तक से बातचीत में आरोपी के पिता ने हाथ जोड़कर पूरे समाज से इस कृत्य के लिए माफी मांगी. उन्होंने कहा कि 'स्याही का धब्बा तो दो-तीन दिन में मिट जाता है, लेकिन मेरे बेटे ने जो कलंक का धब्बा परिवार पर लगाया है, वह कई पीढ़ियों तक नहीं मिटेगा.' उन्होंने कहा कि पीयूष की इस करतूत ने पूरे परिवार को जीते जी मार दिया है और अब उन्हें कहीं भी जाने में शर्म महसूस हो रही है.
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