इंदौर में जल संकट के बीच सड़कों पर बह गया नर्मदा का लाखों लीटर पानी; बायपास पर पाइपलाइन फूटी, 8 इलाकों में सप्लाई प्रभावित

प्राची अवस्थी

• 01:14 PM • 15 Oct 2026

इंदौर बायपास पर सड़क निर्माण के दौरान नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे 3 से 4 एमएलडी साफ पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो गया.पढ़ें पूरी खबर

इंदौर में बर्बाद हजारों लीटर पानी
इंदौर में बर्बाद हजारों लीटर पानी
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एक तरफ जहां इंदौर शहर भीषण जल संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक लापरवाही के कारण नर्मदा का लाखों लीटर साफ पानी सड़कों पर बहकर बर्बाद हो गया. दरअसल मामला शहर के बायपास स्थित भंडारी रिसॉर्ट के पास का है, जहां सड़क निर्माण कार्य के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई है.

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ट्रक की टक्कर से फूटी मुख्य पाइपलाइन, हाईवे पर बना फव्वारा

जानकारी के अनुसार, बायपास पर चल रहे सड़क निर्माण कार्य के दौरान एक ट्रक वाल्व से टकरा गया. इस टक्कर के कारण नर्मदा की मुख्य पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई. पानी का दबाव इतना तेज था कि सड़क पर फव्वारे जैसी स्थिति बन गई और पानी की ऊंची धार पास ही बने ब्रिज के ऊपर तक पहुंचने लगी. इस घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

3 से 4 एमएलडी पानी बर्बाद होने का अनुमान

इस पूरी घटना पर नगर निगम के प्रतिनिधि बबलू शर्मा के मुताबिक, पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने से लगभग 3 से 4 एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) पानी बर्बाद होने का अनुमान जताया गया है. घटना की सूचना मिलते ही नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और सुधार कार्य में जुट गई है.

8 से ज्यादा इलाकों में जलापूर्ति प्रभावित, टैंकरों से सप्लाई का दावा

पाइपलाइन में हुए इस लीकेज का सीधा असर बायपास से सटे 8 से अधिक इलाकों की जलापूर्ति पर पड़ा है. इन क्षेत्रों में अब पानी बेहद कम दबाव (Low Pressure) के साथ पहुंच रहा है. निगम प्रशासन का दावा है कि प्रभावित इलाकों में पेयजल आपूर्ति बनाए रखने के लिए टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाया जा रहा है और मरम्मत कार्य पूरा होते ही सप्लाई को फिर से सामान्य कर दिया जाएगा.

लापरवाही पर खड़े हो रहे गंभीर सवाल

भीषण जल संकट के बीच इस तरह पानी का बर्बाद होना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है. महज 4 महीने पहले भी इंदौर में नर्मदा पाइपलाइन में हुए भीषण लीकेज के कारण हजारों लीटर पानी बर्बाद हो चुका था. बार-बार दोहराई जा रही ऐसी घटनाएं पाइपलाइनों की सुरक्षा, नियमित रखरखाव और प्रशासनिक निगरानी व्यवस्था पर बड़े सवाल उठा रही हैं.