मिनी मुंबई कहे जाने वाले इंदौर के इतिहास में रामनवमी के पावन अवसर पर एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया है. राजवाड़ा स्थित मल्हार मार्तंड मंदिर में आयोजित एक भव्य समारोह में यशवंत राव होलकर बहादुर को होलकर राज परिवार का नया उत्तराधिकारी घोषित किया गया है. परंपरा और आधुनिकता के इस संगम ने सदियों पुरानी गौरवशाली विरासत को नई पीढ़ी के हाथों में सौंप दिया है.
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महारानी उषा देवी की इच्छा से हुआ राजतिलक
इंदौर की महारानी उषा देवी की इच्छा के अनुसार, युवराज यशवंत राव होलकर को राजवंश का नया वारिस चुना गया है. इस खास मौके पर उनकी बहन सबरीना राजे को राजकुमारी की उपाधि दी गई. राजवाड़ा के ऐतिहासिक परिसर में होलकर राजवंश से जुड़े सदस्यों की मौजूदगी में पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ दोनों का राजतिलक किया गया. उन्हें पान-सुपारी देकर और 'होलकरी पागा' भेंट कर सम्मानित किया गया.
कौन हैं यशवंत राव होलकर?
यशवंत राव होलकर का संबंध उस महान राजवंश से है जिसकी नींव मल्हार राव होलकर ने रखी थी. होलकर वंश के अंतिम शासक महाराजा यशवंत राव द्वितीय, जो अपनी दूरदर्शी सोच के लिए विख्यात थे, उनके वंशज के रूप में अब युवा यशवंत राव इस विरासत को आगे बढ़ाएंगे. हालांकि उनकी जीवनशैली में आधुनिकता की झलक दिखती है, लेकिन उनके संस्कार और उत्तरदायित्व पूरी तरह से मराठा शौर्य और मालवा की मिट्टी से जुड़े हैं.
गौरवशाली है होलकर वंश का इतिहास
यह वही राजवंश है जिसने लोकमाता अहिल्याबाई होलकर जैसी शासिका देश को दी. अहिल्याबाई ने न केवल साम्राज्य संभाला, बल्कि काशी विश्वनाथ और सोमनाथ जैसे मंदिरों का पुनरुद्धार कर सनातन संस्कृति को नई संजीवनी दी थी. मल्हार राव होलकर ने पेशवा बाजीराव के साथ मिलकर मराठा शक्ति को मध्य भारत में फैलाया और इंदौर को अपनी रियासत बनाया. अब इसी विरासत की मशाल यशवंत राव होलकर के हाथों में है.
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