इंदौर की 22 साल की श्रद्धा तिवारी का मामला इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर पुलिस थाने तक काफी चर्चा में बना हुआ है. शुरुआत में श्रद्धा ने दावा किया कि उसने जिस लड़के (करण योगी) से शादी की है उसके साथ उसकी पहली मुलाकात ट्रेन में हुई थी, जहां करण ने उसकी जान बचाई और दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया, लेकिन अब इस कहानी में बड़ा ट्विस्ट सामने आया है.
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पहली नजर का प्यार या पहले से पहचान?
श्रद्धा जब करण योगी के साथ शादी करके वापस आई तो मीडिया को बताया कि वो मरने जा रही थी, उसी वक्त उसे करण ने उसे बचाया और फिर दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया, लेकिन जब पुलिस ने जांच शुरू की तो पता चला कि करण और श्रद्धा की मुलाकात पहली बार ट्रेन में नहीं हुई, बल्कि दोनों इंदौर के गुजराती कॉलेज में इससे पहले भी मिल चुके थे. करण उसी कॉलेज में इलेक्ट्रिशियन का काम करता था और श्रद्धा वहीं की छात्रा थी.
पुलिस को भी हुआ शक
अब पुलिस के सामने सवाल खड़े हो गए हैं कि क्या वाकई ये मात्र इत्तेफाक था कि दोनों एक ही ट्रेन में मिले या पहले से कुछ प्लानिंग थी? इतना ही नहीं, पुलिस की पड़ताल में यह भी सामने आया कि श्रद्धा और करण पहले से एक-दूसरे को जानते थे और ट्रेन वाली कहानी सिर्फ एक ड्रामा हो सकता है.
कैसे हुआ मामला उजागर?
दरअसल ये मामला इंदौर की श्रद्धा का है. श्रद्धा 23 अगस्त को लापता हो गई थी. 6 दिन बाद वो अचानक एमआईजी थाने में करण नाम के एक व्यक्ति के साथ आ गई और पुलिस को बताया कि उसने करण से मंदिर में शादी कर ली है. हालांकि श्रद्धा जब घर से भागी थी उस वक्त किसी और से शादी करनी थी.
शुरुआत में श्रद्धा के पिता ने करण पर अपहरण करने या दवाब बनाने का शक जताया, लेकिन बाद में जब बेटी ने साफ कहा कि वह अपनी मर्जी से शादी कर चुकी है तो पिता भी पीछे हट गए.
क्या कहती है पुलिस?
पुलिस इस पूरे मामले की तह तक जाने में जुटी है. श्रद्धा और करण की ट्रेन में हुई "पहली मुलाकात" अब झूठी लगने लगी है और पुरानी पहचान की बात सामने आने के बाद शक की सुई भी घूम गई है.
नतीजा क्या निकला?
इस मामले में श्रद्धा के परिवार ने अब उसकी मर्जी को मान लिया है और करण के साथ रहने की इजाजत भी दे दी है, लेकिन ये मामला बता गया कि हर लव स्टोरी की सच्चाई वैसी नहीं होती जैसी दिखाई जाती है.
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