Indore Water Contamination: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पानी से फैली बीमारी और उससे हुई मौतों को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो पाई है. मौतों के आंकड़ों को लेकर प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों के दावों में विरोधाभास सामने आ रहा है. इस बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि सरकार के लिए आंकड़ों से ज्यादा जनता का दुख अहम है.
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मुख्यमंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एक भी व्यक्ति की मौत बेहद दुखद है. सरकार राहत देने के समय केवल आधिकारिक आंकड़ों में नहीं उलझेगी, सीएम ने कहा कि सरकार हर पीड़ित परिवार के साथ खड़ी रहेगी. प्रशासनिक स्तर पर मौतों की गिनती तय प्रक्रिया के तहत होती है, जिसमें आमतौर पर पोस्टमार्टम के मामलों को ही आधिकारिक माना जाता है.
सरकारी रिकॉर्ड में 7 मौतें!
इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी से हुई मौतों के आंकड़ों में अलग-अलग बातें सामने आ रही है. जिला प्रशासन ने 18 पीड़ित परिवारों को मुआवजे के चेक सौंपे हैं, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में मौतों की संख्या 7 बताई जा रही है. इससे यह सवाल खड़ा हो गया कि वास्तविक आंकड़ा आखिर क्या है.
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के अलग-अलग दावे
इंदौर संभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने अब तक 7 मौतों की पुष्टि की है. वहीं कुछ अधिकारी दूषित पानी से जुड़ी 6 मौतों की बात कह रहे हैं.वहीं, स्थानीय लोगों को आंकड़ों को लेकर अलग दावा कर रहे हैं.
इंदौर के मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 2 जनवरी को कहा था कि डायरिया फैलने से कम से कम 10 मरीजों की मौत की जानकारी उन्हें मिली है. वहीं, स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस प्रकोप में छह महीने के बच्चे समेत करीब 17 लोगों की जान गई है.
"एक भी जान का जाना हमारे लिए बहुत दुखद है. इसलिए, हम आंकड़ों में नहीं पड़ते. यह अलग बात है कि प्रशासन अपनी प्रक्रियाएं अपनाता है. आमतौर पर केवल उन्हीं मामलों को सही आंकड़ा माना जाता है, जिनमें पोस्टमार्टम किया गया हो." - सीएम मोहन यादव
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