इंदौर: मध्य प्रदेश की मिनी मुंबई कहे जाने वाले शहर इंदौर में पानी की किल्लत अब केवल एक प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन गई है. शहर में गहराते जलसंकट के समाधान के लिए प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय द्वारा बुलाई गई अहम समीक्षा बैठक में जनप्रतिनिधियों की बड़ी गैरमौजूदगी ने सत्तारूढ़ बीजेपी और नगर निगम प्रशासन के बीच के तालमेल पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. इस बैठक के बाद बीजेपी की वरिष्ठ विधायक और इंदौर की पूर्व महापौर मालिनी गौड़ के तीखे बयानों ने नगर निगम की कार्यप्रणाली की पोल खोलकर रख दी है.
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जब समाधान ही नहीं, तो बैठकों का क्या औचित्य?- मालिनी गौड़
बैठक में शामिल न होने के सवाल पर विधायक मालिनी गौड़ ने अपनी भड़ास निकालते हुए दो टूक बयान दिया. उन्होंने कहा कि
बैठकों में जाने और जनता की समस्याएं उठाने के बावजूद जब अधिकारी कोई समाधान नहीं निकालते, तो ऐसी बैठकों में शामिल होने का कोई फायदा नहीं है. मालिनी गौड़ ने बताया कि उनके महापौर कार्यकाल के दौरान 'गोदवले धाम' में पानी की टंकी बनाई गई थी. इतने साल बीत जाने के बाद भी इस टंकी को आज तक बिजली का कनेक्शन नहीं मिल सका है. उन्होंने यह भी कहा कि विधानसभा क्षेत्र में टंकी तो खड़ी कर दी गई, लेकिन पानी सप्लाई के लिए जरूरी वितरण पाइपलाइन (Distribution Pipeline) अब तक नहीं बिछाई गई है. उन्होंने आरोप लगाया कि नगर निगम में छोटे-छोटे विकास और बुनियादी कामों के लिए बार-बार कहना पड़ता है, फिर भी कोई सुनवाई नहीं होती.
नौ में से 5 विधायक और सांसद रहे नदारद
इंदौर में जलसंकट कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस मुद्दे पर बुलाई गई बैठक से शहर के अधिकांश प्रमुख चेहरे ही गायब रहे.
- बैठक में पहुंचे नेता: महापौर पुष्यमित्र भार्गव, कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, विधायक मधु वर्मा, महेंद्र हार्डिया और रमेश मेंदोला
- बैठक से नदारद रहने वाले नेता: सांसद शंकर लालवानी, विधायक मालिनी गौड़, गोलू शुक्ला, मनोज पटेल, तुलसी सिलावट और उषा ठाकुर.
कैलाश विजयवर्गीय का तंज
जब संवाददाताओं ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जनप्रतिनिधियों की अनुपस्थिति पर सवाल पूछा, तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि
"यह सवाल मुझसे क्यों पूछ रहे हैं? जो गैरमौजूद हैं, उनसे पूछना चाहिए. शायद उनके विधानसभा क्षेत्र में जलसंकट नहीं होगा, इसलिए वे बैठक में नहीं आए होंगे."
जनता पानी को तरस रही, तंत्र जिम्मेदारियों से भाग रहा
इंदौर नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की इस आपसी खींचतान के बीच पिसना आखिरकार आम जनता को ही पड़ रहा है. गर्मियों की दस्तक के साथ ही शहर की कई कॉलोनियों में पानी की सप्लाई बाधित हो रही है. मालिनी गौड़ के इस बागी रुख ने यह तो साफ कर दिया है कि नगर निगम में लंबित पड़े विकास कार्य सिर्फ विपक्ष का आरोप नहीं, बल्कि बीजेपी के अपने विधायकों का भी दर्द हैं.
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