मध्य प्रदेश के इंदौर से आई MBA छात्रा के मर्डर की खबर सिर्फ एक क्राइम स्टोरी नहीं है यह एक भरोसे के टूटने की कहानी है. 24 साल की एक एमबीए छात्रा जो अपने भविष्य के सपने बुन रही थी उसी युवक के हाथों मारी गई जिस पर उसे सबसे ज्यादा भरोसा किया था. आरोपी उसका क्लासमेट था और दोनों के रिलेशननशिप की चर्चा कॉलेज में भी थी.
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उस दिन क्या हुआ?
पुलिस के मुताबिक युवक ने युवती को द्वारकापुरी स्थित अपने किराए के कमरे पर बुलाया. रास्ते में सब सामान्य था. सीसीटीवी में दोनों साथ जाते दिखाई दिए. लड़की ने अपनी छोटी बहन को मैसेज कर बताया था कि वह बर्थडे पार्टी में जा रही है. उसे जरा भी अंदाजा नहीं था कि यह उसका आखिरी दिन साबित होगा.
बताया जा रहा है कि आरोपी को शक था कि उसकी गर्लफ्रेंड किसी और लड़के से बात करती है. उसे पसंद नहीं था कि वह किसी और दोस्त से बात करे. लड़की के मोबाइल में एक नंबर देखने के बाद उसका शक और गहरा गया. इसी बात को लेकर दोनों के बीच पहले भी कहासुनी होती थी. उस दिन भी कमरे में पहुंचने के बाद बहस शुरू हुई. बहस इतनी बढ़ी कि आरोपी ने गुस्से में उसकी जान ले ली.
मौत के बाद भी संवेदनहीनता
इस पूरे मामले में जो बात लोगों को सबसे ज्यादा झकझोर रही है वह है आरोपी का रवैया. आरोप है कि हत्या के बाद उसने युवती के मोबाइल से एक आपत्तिजनक वीडियो कॉलेज के व्हाट्सऐप ग्रुप में डाल दिया. मानो वह मरने के बाद भी उसकी इमेज को खराब करना चाहता था. बताया जा रहा है वह कुछ समय तक शव के पास ही बैठा रहा. फिर कमरे के बाहर ताला लगाकर ट्रेन से महाराष्ट्र के पनवेल होते हुए मुंबई चला गया.
तीन दिन बाद मिला शव
वहीं तीन दिन तक लड़की लापता रही लेकिन 13 फरवरी को जब उस कमरे से बदबू आने लगी तो पड़ोसियों को शक हुआ. पुलिस पहुंची तो अंदर से युवती का शव मिला. वह दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप गई. मोबाइल लोकेशन और तकनीकी जांच के आधार पर पुलिस ने आरोपी को मुंबई से गिरफ्तार किया और इंदौर वापस लाया.
गिरफ्तारी के बाद भी नहीं दिखा पछतावा
गिरफ्तारी के बाद आरोपी का बर्ताव भी सवाल खड़े करता है. मीडिया के सामने उसने कहा, 'जो हो गया, हो गया… समय आने पर सब बताऊंगा.' पुलिस का कहना है कि वह खुद को मानसिक रूप से अस्थिर दिखाने की कोशिश कर रहा था. हालांकि पूछताछ में उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया है.
प्यार, शक और एक अधूरा सपना
बताया जा रहा है कि युवती आरोपी से शादी करना चाहती थी. उसने रिश्ते को बचाने की कोशिश भी की, लेकिन आरोपी के मन में बैठा शक खत्म नहीं हुआ. धीरे-धीरे वही शक गुस्से में बदला और गुस्सा हिंसा में.
यह कहानी सिर्फ एक लड़की की मौत की नहीं है. यह उस सोच की कहानी है जहां प्यार को अधिकार समझ लिया जाता है और भरोसे की जगह नियंत्रण लेने लगता है.
सवाल जो रह गए
क्या एक मोबाइल नंबर किसी की जान लेने की वजह बन सकता है? क्या शक इतना खतरनाक हो सकता है कि इंसान इंसानियत भूल जाए? बता दें कि इस पूरे मामले की जांच अभी जारी है. कोर्ट तय करेगी कि आरोपी को क्या सजा मिलेगी.
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