मध्य प्रदेश में लगातार हो रही बारिश के बीच जबलपुर को राजधानी भोपाल से जोड़ने वाले नेशनल हाईवे 45 (NH-45) पर एक खौफनाक हादसा सामने आया है. बीती देर रात नौरादेही अभयारण्य के सुरक्षित वन क्षेत्र से गुजरने वाले हाईवे पर अचानक पहाड़ का एक बड़ा हिस्सा भरभरा कर सीधे सड़क पर आ गिरा. इस भीषण लैंडस्लाइड से सड़क पूरी तरह मलबे से पट गई.
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देश में चर्चित 'रेड ट्विल टॉप' तकनीक की खुली पोल
गौरतलब है कि एनएच-45 का यह हिस्सा देशभर में अपनी खास 'रेड ट्विल टॉप' (Red Twill Top) तकनीक और रंग-बिरंगी बनावट के लिए काफी चर्चित रहा था. इस सड़क को लाल रंग से रंगा गया था और स्पीड कंट्रोल के हिसाब से विशेष डिजाइन दिया गया था. निर्माण के समय इसके दावों की काफी तारीफ हुई थी, लेकिन मानसून की पहली ही तेज बारिश ने निर्माण की गुणवत्ता और दावों की पोल खोलकर रख दी है.
टला बड़ा हादसा
जानकारी के मुताबिक, यह घटना आधी रात करीब 12:00 बजे की है. राहत की बात यह रही कि जिस वक्त पहाड़ धंसा, उस समय सड़क से कोई वाहन नहीं गुजर रहा था. रात का समय होने के कारण हाईवे पर ट्रैफिक काफी कम था, जिससे एक बड़ी तबाही टल गई. स्थानीय कर्मचारियों के अनुसार, इस क्षेत्र में भारी बारिश के दौरान अक्सर ऐसी स्थितियां बनती हैं.
NHAI की लापरवाही पर उठे सवाल
हादसे के बाद विभाग ने आनन-फानन में वन-वे (One-Way) ट्रैफिक तो शुरू करवा दिया, लेकिन मलबे के विशाल ढेर को हटाने के नाम पर केवल एक जेसीबी मशीन तैनात की गई. घटना के घंटों बीत जाने के बाद भी एनएचएआई का कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा.
फिलहाल प्रशासन के सामने मलबे को हटाकर यातायात को सुरक्षित रूप से पूरी तरह बहाल करने की चुनौती है. लेकिन इस घटना ने सवाल खड़ा कर दिया है कि नई तकनीक के बड़े-बड़े दावों के बीच यदि सड़कें पहली बारिश भी नहीं झेल पा रही हैं, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी किसकी होगी?
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