मध्य प्रदेश के जबलपुर में बरगी बांध पर हुए भीषण क्रूज हादसे ने कई परिवारों को उम्र भर का दर्द दे दिया है. इस हादसे की सबसे हृदयविदारक तस्वीर अस्पताल से सामने आ रही है, जहां मासूम बच्चे अपनी मां के लौटने का इंतजार कर रहे हैं. उन्हें नहीं पता कि जिस मां को वो पुकार रहे हैं, वह अब इस दुनिया में नहीं रहीं.
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खुशियां मातम में बदलीं
जबलपुर के रहने वाले 42 वर्षीय मनोज श्रीवास गुरुवार की शाम अपनी पत्नी ज्योति और तीन बच्चों- अंशिका, तनिष्का और तनिष्क के साथ क्रूज राइड का आनंद लेने पहुंचे थे. परिवार में हंसी-खुशी का माहौल था, लेकिन किसे पता था कि लहरें काल बनकर आएंगी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अचानक आए तेज आंधी-तूफान और ऊंची लहरों के कारण क्रूज अनियंत्रित होकर हादसे का शिकार हो गया.
"मम्मी कहां है?" मासूम के सवाल का किसी के पास जवाब नहीं
हादसे के बाद रेस्क्यू टीम ने मनोज और उनके तीनों बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, लेकिन मां ज्योति क्रूज के निचले हिस्से में फंस गईं. 7 साल का मासूम तनिष्क, जो अभी मौत और हादसे के मतलब से भी अनजान है, अस्पताल के बिस्तर से बार-बार एक ही सवाल पूछ रहा है- "मम्मी कहां है? मम्मी कब आएंगी?". उसकी बड़ी बहनें अपने आंसू पोंछकर छोटे भाई को दिलासा दे रही हैं कि मां बस आती ही होंगी, जबकि वे खुद गहरे सदमे में हैं.
सुरक्षा में चूक के आरोप
हादसे में बची 11वीं की छात्रा अंशिका ने बताया कि क्रूज पर शुरुआत में उन्हें लाइफ जैकेट नहीं दी गई थी. जब आंधी-तूफान शुरू हुआ और लहरें तेज हुईं, तब जाकर आनन-फानन में लाइफ जैकेट बांटी गईं. यह बयान प्रशासन और क्रूज संचालकों की बड़ी लापरवाही की ओर इशारा करता है.
रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासन की कार्रवाई
शुक्रवार शाम तक मलबे से 9 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि लापता लोगों की तलाश अब भी जारी है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी मौके पर पहुंचकर पीड़ितों से मुलाकात की और घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. भारी मलबे और गहराई के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, लेकिन अब क्रूज को बाहर निकाल लिया गया है.
इस हादसे ने न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि इन मासूम बच्चों के सिर से मां का साया हमेशा के लिए छीन लिया है.
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