मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से सवाल पूछने पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडेय का रिहाई के बाद बयान सामने आया है. उन्होंने हिरासत में लिए जाने की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि लोकतंत्र को बचाने की बात करने वाली सरकार सवाल पूछने वालों को ही कार्यक्रम से बाहर कर रही है. पांडेय का आरोप है कि उन्हें और उनकी पत्नी संगीता पांडेय को कार्यक्रम में अभद्रता का सामना करना पड़ा और पुलिस परदेशीपुरा थाने ले गई थी.
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'सवाल पूछने वालों को गालियां दी गईं'
वीडियो जारी कर प्रहलाद पांडेय ने आरोप लगाया कि कार्यक्रम में उनके साथ गाली-गलौज और अभद्रता की गई. इसके बाद पुलिस उन्हें और उनकी पत्नी को परदेशीपुरा थाने ले गई. वहां उनके खिलाफ न्यूसेंस क्रिएट करने के आरोप में मामला दर्ज करने की बात कही गई. पांडेय के मुताबिक, उन्होंने पुलिस से सवाल किया कि आखिर उन्होंने किस तरह की अशांति पैदा की है ? उन्होंने बताया कि बाद में उनका बयान दर्ज किया गया और शिकायत रद्द कर दिया दी गई. इसके बाद वह शाम करीब 6 बजे घर लौट आए. उन्होंने कहा, सत्ता को सवाल चुभते हैं. जब एक प्रहलाद पांडेय और एक संगीता पांडेय सवाल करते हैं तो उन्हें कीड़े-मकोड़े कहा जाता है, गालियां दी जाती हैं. लेकिन जब यही सवाल जनता पूछने लगेगी तो सरकार को जवाब देना पड़ेगा. पांडेय ने कहा कि लोकतंत्र केवल रैलियां निकालने और नारे लगाने से स्थापित नहीं होता. लोकतंत्र तभी मजबूत होता है, जब जनता के सवालों को महत्व दिया जाए और सत्ता में बैठे लोग उनका जवाब दें.
33 हजार के फिनाइल का पोस्टर बना विवाद की वजह
पूरा मामला शुक्रवार, 30 अक्टूबर को इंदौर में बीजेपी की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा के समापन कार्यक्रम का है। यह पदयात्रा सुभाष नगर चौराहे से शुरू होकर पाटनीपुरा चौराहे पर समाप्त हुई थी. इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और बीजेपी के प्रदेश प्रभारी बिप्लब कुमार देब समेत कई नेता शामिल हुए थे. कार्यक्रम के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता प्रहलाद पांडेय अपनी पत्नी के साथ एक पोस्टर लेकर पहुंचे. पोस्टर के जरिए उन्होंने मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में खरीदारी के नाम पर कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए. पोस्टर में 30 हजार रुपये के एक बल्ब और 33 हजार रुपये प्रति लीटर फिनाइल की कथित खरीद का जिक्र था. उनकी पत्नी के हाथ में फिनाइल की बोतल भी थी. प्रहलाद पांडेय इन आरोपों को लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जवाब मांग रहे थे, लेकिन मौके पर विवाद शुरू हो गया. पोस्टर देखते ही मंच पर मौजूद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय नाराज हो गए. वायरल वीडियो में वे पुलिस अधिकारियों को बुलाकर प्रहलाद पांडेय को वहां से हटाने की बात कहते सुनाई दिए. इस दौरान उन्होंने पांडेय के लिए अपमानजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया. इसके बाद पुलिस ने प्रहलाद पांडेय और उनकी पत्नी को हिरासत में ले लिया.
पहले भी उठा चुके हैं स्थानीय मुद्दे
प्रहलाद पांडेय इंदौर में नगर निगम से जुड़े मुद्दों, कथित भ्रष्टाचार और राजनीतिक पोस्टरों को लेकर लगातार आवाज उठाते रहे हैं. इससे पहले भी वे मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के आवास के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं. वहीं बीजेपी विधायक गोलू शुक्ला के समर्थकों पर भी उन्होंने मारपीट करने के आरोप लगाए थे. अब बीजेपी के लोकतंत्र बचाओ अभियान के कार्यक्रम में भ्रष्टाचार के आरोपों वाला पोस्टर दिखाने और उसके बाद हिरासत में लिए जाने का मामला चर्चा में है. रिहाई के बाद प्रहलाद पांडेय के बयान ने इस पूरे विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है.
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