खंडवा में पटवारी का महाघोटाला, गांव की बावड़ी-चबूतरे समेत 51 पट्टे खुद और पत्नी के नाम किए

जय नागड़ा

• 08:08 PM • 25 Sep 2026

एमपी के खंडवा में स्वामित्व योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा. कोलगांव के पटवारी राजेश मंडलोई ने सार्वजनिक बावड़ी, चबूतरे और गरीबों के मकान सहित 51 पट्टे अपने नाम किए. कलेक्टर ने किया निलंबित.

पटवारी ने खुद और पत्नी के नाम से सरकारी पट्टा किया
पटवारी ने खुद और पत्नी के नाम से सरकारी पट्टा किया
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खंडवा: मध्य प्रदेश के खंडवा जिले से भ्रष्टाचार का एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकार की 'स्वामित्व योजना' के तहत ग्रामीणों को उनकी जमीन का मालिकाना हक दिलाने की जिम्मेदारी जिस पटवारी के कंधों पर थी, उसी ने सिस्टम में सेंधमारी कर दी. हद तो तब हो गई जब इस भ्रष्ट पटवारी ने सार्वजनिक बावड़ी, बस स्टैंड के चबूतरे और गरीबों के मकानों सहित कुल 51 पट्टे खुद के और अपनी पत्नी के नाम लिखवा लिए. मामला उजागर होने के बाद कलेक्टर ने आरोपी पटवारी को सस्पेंड कर दिया है.

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कैसे रचा गया यह 'काला खेल'? 

यह पूरा फर्जीवाड़ा खंडवा जिले के कोलगांव का है. केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'स्वामित्व योजना' के तहत इस गांव में कुल 935 आवासीय पट्टे जारी किए जाने थे. ग्रामीणों को उम्मीद थी कि पीढ़ियों से जिस जमीन पर वे रह रहे हैं, अब उसका कानूनी हक उन्हें मिल जाएगा. लेकिन योजना के क्रियान्वयन के दौरान तत्कालीन पटवारी राजेश मंडलोई ने अपनी कुर्सी का बेजा इस्तेमाल किया. 

राजेश मंडलोई ने गांव के सरकारी रिकॉर्ड में ऐसा हेरफेर किया कि कुल 935 पट्टों में से 48 पट्टे अपने नाम और 3 पट्टे अपनी पत्नी मनीषा मंडलोई के नाम दर्ज करा लिए. यानी पूरे गांव के 51 पट्टे अकेले पटवारी के परिवार की जेब में चले गए. 

सार्वजनिक बावड़ी और चबूतरे को भी नहीं छोड़ा

इस महाघोटाले का पर्दाफाश तब हुआ जब गांव के ही शुभम तोमर नाम के युवक ने इसकी शिकायत की और कांग्रेस जिलाध्यक्ष उत्तम पाल सिंह ने दस्तावेजों के साथ इस पूरे फर्जीवाड़े की कलई खोल दी.

ग्रामीणों ने बताया कि करीब दो-तीन साल पहले पटवारी राजेश मंडलोई सर्वे के नाम पर रिकॉर्ड दुरुस्त करने गांव आया था. इसी दौरान उसने चुपके से बड़ा खेल कर दिया.

  • सार्वजनिक बावड़ी: शुभम तोमर के घर के पीछे स्थित वह बावड़ी, जिसका पानी पूरा गांव पीता है, उसे पटवारी ने अपने नाम कर लिया.
  • बस स्टैंड का चबूतरा: गांव के बस स्टैंड पर बना RCC का सार्वजनिक चबूतरा भी पटवारी की संपत्ति बन गया.
  • गरीब का मकान: ग्रामीण बलिराम का मकान (खसरा नंबर 530) भी पटवारी ने अपने रिकॉर्ड में दर्ज कर लिया.

जांच में खुली पोल, कलेक्टर का सख्त एक्शन

शिकायत के बाद प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया. मामले की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान पटवारी राकेश को मौके पर भेजकर जमीनी जांच कराई गई. ग्रामीणों की मौजूदगी में जब खसरों का मिलान किया गया, तो पटवारी राजेश मंडलोई के फर्जीवाड़े की शत-प्रतिशत पुष्टि हो गई.

जांच रिपोर्ट टेबल पर आते ही खंडवा कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने सख्त रुख अपनाया. उन्होंने आरोपी पटवारी राजेश मंडलोई को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया है.

अब आगे क्या?

कलेक्टर ने आदेश दिए हैं कि कोलगांव के सभी 935 खसरों और पट्टों की दोबारा बारीकी से जांच की जाए और रिकॉर्ड को तुरंत दुरुस्त किया जाए.


कानून और रिकॉर्ड की रक्षा करने वाले ही जब उसे अपनी जागीर समझने लगें, तो आम जनता का सिस्टम पर से भरोसा डगमगाना लाजमी है. खंडवा का यह मामला महज एक बानगी है कि कैसे निचले स्तर पर बैठे अधिकारी सरकारी योजनाओं को दीमक की तरह चाट रहे हैं. भ्रष्ट पटवारी पर निलंबन की गाज तो गिर चुकी है, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि कोलगांव के ग्रामीणों को उनके हक की जमीन बिना किसी और परेशानी के कब तक मिल पाएगी?