मऊगंज (मध्य प्रदेश): 'हर घर जल' पहुंचाने के दावे के साथ शुरू हुई केंद्र सरकार की फ्लैगशिप 'जल जीवन मिशन' योजना मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. कागजों में 3 करोड़ 85 लाख रुपये का काम पूरा दिखाकर ठेकेदार को शत-प्रतिशत भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन जब हकीकत परखी गई तो सिस्टम के दावों की पोल खुल गई. नईगढ़ी ब्लॉक के खटखरी गांव में जब 30 फीट ऊंची पानी की टंकी में पहली बार पानी भरा गया, तो वह ताश के पत्तों की तरह भरभराकर गिर गई. इस मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) रीवा ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग के तीन इंजीनियरों और मुख्य ठेकेदार के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है. घोटाले का मुख्य आरोपी ठेकेदार सत्ताधारी दल बीजेपी के किसान मोर्चा का जिला उपाध्यक्ष है.
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ताश के पत्तों की तरह ढहा ओवरहेड टैंक, बाल-बाल बचा चालक
खटखरी गांव में मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका निर्माण कभी 30 फीट ऊंचा ओवरहेड टैंक हुआ करता था. मार्च 2026 में निर्माण के बाद जब इसमें पहली बार परीक्षण के लिए पानी भरा गया, तो भ्रष्टाचार की खोखली नींव पर बनी यह टंकी चंद सेकंड में जमींदोज हो गई. हादसे के वक्त पास ही सो रहा एक जेसीबी चालक बाल-बाल बच गया, वरना बड़ा हादसा हो सकता था. ग्रामीणों का सीधा आरोप है कि ठेकेदार ने मुनाफा कमाने के लिए निर्माण मानकों की जमकर धज्जियां उड़ाईं. भारी-भरकम टंकी के निर्माण में महज 8 एमएम के पतले सरियों का इस्तेमाल किया गया था, जो पानी का दबाव सहने में पूरी तरह असमर्थ रहे.
2021-22 में लिखी गई थी घोटाले की पटकथा
इस पूरे घोटाले की नींव साल 2021-22 में रखी गई थी. नईगढ़ी ब्लॉक के आधा दर्जन से अधिक गांवों में ओवरहेड टैंक, संपवेल, पाइपलाइन और घर-घर नल कनेक्शन के लिए 3 करोड़ 85 लाख रुपये का ठेका 'मेसर्स शिवेंद्र कुमार तिवारी' को दिया गया था. फर्म के प्रोपराइटर शिवेंद्र तिवारी वर्तमान में बीजेपी किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष हैं. आरोप है कि PHE विभाग के अधिकारियों ने बिना धरातल पर काम जांचे और बिना कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र (Completion Certificate) के ही ठेकेदार के खाते में पूरी रकम ट्रांसफर कर दी.
EOW की जांच में खुले चौंकाने वाले राज
मामले की शिकायत के बाद जब EOW रीवा की टीम ने मौके पर जाकर पड़ताल की, तो भारी गड़बड़ियां सामने आई. करह उर्फ खैरागढ़: योजना के तहत 5 मोटर पंप लगाए जाने थे, लेकिन मौके पर केवल 1 मोटर मिली. सरकारी रिकॉर्ड में 740 घरों में नल कनेक्शन का दावा किया गया था, लेकिन जांच टीम को एक भी घर में नल की टोंटी या फिटिंग नहीं मिली. कंक्रीट स्टैंड पोस्ट भी नदारद थे.
शिवराजपुर और जुड़मनिया: यहां ओवरहेड टैंक और संपवेल का काम अधूरा पड़ा था. मुख्य पाइपलाइन भी महज आधी बिछाकर छोड़ दी गई. अन्य गांव: पाइपलाइन सिर्फ गांव की सीमा तक पहुंचाकर छोड़ दी गई, जबकि घरों के भीतर कनेक्शन दिए ही नहीं गए.
EOW का रुख: EOW रीवा के पुलिस अधीक्षक (SP) अरविंद सिंह ठाकुर ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि शुरुआती जांच में व्यापक स्तर पर वित्तीय अनियमितता और लापरवाही पाई गई है. PHE विभाग के तीन अधिकारियों और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज कर जांच आगे बढ़ाई जा रही है.
मऊगंज में भ्रष्टाचार का पुराना इतिहास
मऊगंज जिले में नल-जल योजना में फर्जीवाड़े का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी मुख्यमंत्री के 'समाधान ऑनलाइन' कार्यक्रम के दौरान गेरुआरी सेगरान पंचायत में फर्जी हैंडओवर का मामला उजागर हुआ था. उस समय हुए हंगामे के बाद प्रदेश की 8 हजार पंचायतों में नल-जल योजनाओं की जांच के आदेश देने पड़े थे. ताजा मामले ने एक बार फिर प्रशासनिक निगरानी और राजनीतिक संरक्षण पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. अब देखना यह होगा कि EOW की कार्रवाई के बाद दोषियों को सजा मिलती है या फिर यह मामला भी प्रशासनिक फाइलों में दबकर रह जाएगा.
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