राज्यसभा का नामांकन रद्द होने के बाद अब मीनाक्षी नटराजन को पार्टी से मिली बड़ी जिम्मेदारी!

सुप्रीम कोर्ट से नामांकन रद्द होने के मामले में राहत न मिलने के बाद कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा जताते हुए उन्हें पंजाब का ऑब्जर्वर नियुक्त किया है. पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को लोकतंत्र पर आघात बताते हुए चुनाव आयोग और सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपना रही है.

मिनाक्षी नटराजन को कोर्ट से झटका
मिनाक्षी नटराजन को कोर्ट से झटका

आशुतोष शुक्ला

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मध्य प्रदेश में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने के बाद राज्य का सियासी पारा पूरी तरह गरमाया हुआ है. इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट से भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा है. देश की सर्वोच्च अदालत ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को सीधे-सीधे खारिज कर दिया है और कहा है कि वे इस चुनावी प्रक्रिया के बीच में दखल नहीं दे सकते. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें नसीहत दी है कि वे चुनावी प्रक्रिया खत्म होने के बाद हाई कोर्ट में इलेक्शन पिटीशन (चुनाव याचिका) दायर कर सकती हैं.

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लेकिन इस बड़े झटके के बीच सबसे दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस आलाकमान का मीनाक्षी नटराजन पर भरोसा रत्ती भर भी कम नहीं हुआ है. नामांकन खारिज होने के तुरंत बाद पार्टी ने उन्हें एक और बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंप दी है.

खरगे ने जताया भरोसा, मिली पंजाब की जिम्मेदारी

सुप्रीम कोर्ट से राहत न मिलने के बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मीनाक्षी नटराजन पर अपना भरोसा जताया है. पंजाब के मौजूदा राजनीतिक हालात का जायजा लेने और वहां की विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के लिए मीनाक्षी नटराजन को तत्काल प्रभाव से AICC (अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी) का ऑब्जर्वर (पर्यवेक्षक) नियुक्त किया गया है. नटराजन के साथ वरिष्ठ नेता अजय माकन और भजन लाल जाटव को भी इस टीम में शामिल कर पंजाब के लिए बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है.

क्यों रद्द हुआ था नामांकन?

आपको बता दें कि मीनाक्षी नटराजन पर आरोप था कि उन्होंने अपने शपथ पत्र (Affidavit) में कुछ अहम जानकारियां छिपाई थीं, जिसके बाद चुनाव आयोग ने उनका नामांकन खारिज कर दिया था. हालांकि, कांग्रेस इस कार्रवाई को लोकतंत्र और चुनावी निष्पक्षता पर सीधा आघात बता रही है. कांग्रेस प्रवक्ताओं का कहना है कि चुनाव आयोग ने उनकी अर्जियों पर सही ढंग से जवाब तक नहीं दिया.

CJI और चुनाव आयोग को लिखा खुला पत्र

इस फैसले के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता, समर्थक और करीब 300 प्रबुद्ध नागरिकों ने एक बड़ा कदम उठाया है. गुरुवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को एक खुला पत्र लिखा गया है. कांग्रेस प्रवक्ता अवनी बंसल ने इस पत्र को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर भी साझा किया.

इस पत्र में जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 (Representation of the People Act) की धारा 36 का हवाला देते हुए तर्क दिया गया है कि किसी भी उम्मीदवार का नामांकन ऐसे छोटे आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता, जिसका स्वरूप बहुत गंभीर या महत्वपूर्ण न हो.

कांग्रेस का आरोप- "एक देश में दो कानून क्यों?

कांग्रेस नेताओं ने सीधे तौर पर बीजेपी और चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया है. कांग्रेस का आरोप है कि मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मामूली बातों पर खारिज कर दिया गया, जबकि झारखंड में ठीक इसी तरह के मामले में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार को समय दिया गया और उनका नामांकन स्वीकार कर लिया गया. कांग्रेस नेताओं का कहना है कि एक ही देश में दो अलग-अलग राज्यों के लिए चुनाव आयोग के दो तरह के कानून नहीं हो सकते.

फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कांग्रेस के पास अब चुनाव खत्म होने का इंतजार करने और उसके बाद हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. लेकिन पार्टी इस मुद्दे को लेकर सड़क से लेकर संगठन तक पूरी तरह हमलावर है.


 

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