मान लीजिए आप किसी फल की दुकान पर जाएं और दुकानदार आपसे कहे... साहब, एक किलो आम दे रहा हूं, बस ढाई लाख रुपये निकालिए...आप यकीनन दंग रह जाएंगे लेकिन यह कोई मजाक नहीं है. जापान के मशहूर मियाजाकी (Miyazaki Mango) आम की अंतरराष्ट्रीय बाजार में यही कीमत है.
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खास बात ये है कि दुनिया की इस सबसे महंगी तिजोरी की चाबी मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक किसान के पास है और उससे भी बड़ा सस्पेंस ये कि जो आम विदेशों में रईसों की थाली की शोभा बढ़ाता है वो एमपी के इस बाग में बेहद मामूली कीमतों पर बिक रहा है. जापान का 'मियाजाकी' आम की इंटरनेशनल मार्केट में करीब 2.75 लाख प्रति किलो के भाव पर बिकता है. अब आप सोच रहे होंगे कि इस आम में ऐसा क्या हीरा-मोती जड़ा है जो यह इतना महंगा है? चलिए, इसके पीछे की पूरी कहानी आपको आसान शब्दों में समझाते हैं.
न हरा, न पीला...इस कलर के होते हैं ये
यह आम दिखने में आपके लोकल मार्केट वाले आमों जैसा बिल्कुल नहीं होता. इसका शेप किसी बड़े अंडे जैसा होता है. शुरुआत में इसका रंग गहरा बैंगनी होता है लेकिन जैसे-जैसे यह पकता है इसका रंग एकदम चटक लाल हो जाता है. इसी गजब के रंग और रूप की वजह से जापान में इसे 'ताइयो नो तामागो' कहा जाता है, जिसका हिंदी में मतलब होता है- 'सूरज का अंडा'. इस आम को सबसे पहली मियाजाकी प्रीफेक्चर में उगाया गया था. यह जापान के क्यूशू प्रांत में खूबसूरत शहर और जिला है और यही वजह है कि इसका नाम भी मियाजाकि आम रखा गया.
80 के दशक का वो सीक्रेट एक्सपेरिमेंट
इस सुपर-महंगे आम की कहानी शुरू हुई थी 1980 के दशक में जापान के क्यूशू प्रांत के मियाजाकी शहर से. वहां के लोकल किसानों और मियाजाकी यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक गजब का एक्सपेरिमेंट किया. उन्होंने नई टेक्नोलॉजी और पारंपरिक खेती को मिलाकर एक ऐसी वैरायटी तैयार की जो वहां के मौसम में एकदम फिट बैठ गई, नतीजा ये हुआ कि दुनिया को एक ऐसा आम मिला जिसका स्वाद तो लाजवाब था ही साथ ही इसकी लाइफ भी लंबी थी और इसमें कीड़े लगने का डर भी न के बराबर था.
आसान नहीं है उगाना
इस आम का खास बात ये है कि इनके पेड़ को बिल्कुल किसी VIP की तरह पाला जाता है. सबसे पहले किसान खुद एक-एक फूल को अपने हाथों से पॉलिनेट करते हैं ताकि फल बेस्ट क्वालिटी का हो. इसके बाद हर एक आम की छंटाई इस तरह की जाती है कि पेड़ के हर कोने पर मौजूद फल को बराबर धूप और पोषण मिले.
इतना ही नहीं जब आम पकने वाला होता है तो हर एक फल को एक छोटे से जाल से बांध दिया जाता है. आम जब पककर पेड़ से टूटता है तो जमीन पर गिरकर खराब नहीं होता. बल्कि उस जाल में सुरक्षित अटक जाता है. यानी फल पर एक छोटा सा दाग भी बर्दाश्त नहीं किया जाता.
कड़ा में पास होना जरूरी
जापान में इस आम को बाजार में लाने से पहले एक बहुत कड़े टेस्ट से गुजरना पड़ता है. वहां की सरकार ने इसके लिए कड़े नियम बनाए हैं. हर आम का वजन, साइज, उसकी बनावट और सबसे जरूरी, उसकी मिठास चेक की जाती है, जो आम इस टेस्ट में 100% पास होता है उसे ही मियाजाकी का ठप्पा मिलता है. अब इतनी तगड़ी चेकिंग और मेहनत होगी तो जेब तो ढीली करनी ही पड़ेगी.
भारत में भी बढ़ रहा है इसका 'क्रेज'
भारतीयों का आम से प्यार तो जगजाहिर है इसलिए अब भारत के अमीरों और आम के शौकीनों के बीच मियाजाकी आम एक स्टेटस सिंबल बनता जा रहा है. सोशल मीडिया पर भी इसकी खूब चर्चा रहती है. कमाल की बात ये है कि अब भारत की मिट्टी पर भी कुछ जगहों पर मियाजाकी आम उगाने की कोशिशें शुरू हो चुकी हैं.
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