MP Vidhan Sabha Session: मध्य प्रदेश विधानसभा का मानसून सत्र बेहद हंगामेदार और आक्रामक अंदाज में शुरू हुआ है. सत्र के पहले ही दिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ एक बेहद अनोखा और अलग रणनीति के तहत प्रदर्शन किया. कांग्रेस के विधायक सदन परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के सामने एकत्र हुए, जहां कई विधायक केंद्रीय कृषि मंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, वर्तमान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य के कृषि मंत्री इंदल सिंह कनसाना का मुखौटा लगाकर पहुंचे थे.
ADVERTISEMENT
मुखौटों के जरिए सरकार से पूछे चुभते सवाल
इस अनोखे प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मुखौटा लगाए हुए विधायकों से मजाकिया और तंजिया लहजे में पूछते नजर आए कि चुनाव के समय जनता से किए गए वादे आखिर कब पूरे होंगे? कांग्रेस का आरोप है कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने सिर्फ बड़े-बड़े भाषण दिए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर किसानों के हित की कोई भी योजना सफल नहीं हो पा रही है. विपक्ष ने मांग की कि किसानों की आय दोगुनी करने के दावों की असलियत सरकार को बतानी चाहिए.
खाद संकट और 'ओटीपी' व्यवस्था पर उठाए गंभीर सवाल
प्रदर्शन में शामिल कांग्रेस विधायकों ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान का मुखौटा पहनने का मुख्य उद्देश्य उन्हें उनके पुराने वादे याद दिलाना है. विधायकों ने कहा कि जब वह राज्य के मुख्यमंत्री थे तब बड़ी-बड़ी बातें करते थे, लेकिन आज केंद्रीय कृषि मंत्री बनने के बाद भी मध्य प्रदेश के हालात बदतर हैं. जो यूरिया और खाद सीधे सोसायटियों से मिल जानी चाहिए थी, उसके लिए अब ऑनलाइन ओटीपी की व्यवस्था लागू कर दी गई है. ग्रामीण इलाकों में किसान तकनीक की कमी के कारण ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं. एक-एक किसान पांच से छह बार ओटीपी ले रहा है, फिर भी उसे खाद और बीज नसीब नहीं हो रहा.
लाडली बहना योजना को लेकर सरकार पर तीखा हमला
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक ने सरकार की वित्तीय नीतियों पर भी गंभीर सवाल खड़े किए. उन्होंने कहा कि प्रदेश में नौजवान, किसान और बुजुर्ग सभी वर्ग बेहद परेशान हैं. सरकार केवल 'लाडली बहना योजना' की राशि का भुगतान करने के लिए लगातार भारी कर्ज ले रही है. हर महीने कर्ज लेकर इस योजना में पैसा डाला जा रहा है, जिसके चक्कर में किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही है. इसके साथ ही पिछले चार-पांच महीनों से बुजुर्गों और निराश्रितों को मिलने वाली मासिक सामाजिक सहायता राशि भी रुकी हुई है. कांग्रेस ने मांग की कि सरकार ऐसी मुफ्त की घोषणाएं करने के बजाय बुनियादी मुद्दों जैसे किसान और नौजवानों के रोजगार की चिंता करे.
फाइल-फाइल खेल रहे हैं मंत्री, किसान को चाहिए खाद
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि प्रदेश में मुख्यमंत्री, पूर्व मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और राज्य के कृषि मंत्री आपस में सिर्फ फाइलों का खेल खेल रहे हैं, जबकि जमीनी स्तर पर किसान परेशान है. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार किसानों को सिर्फ खाद के टोकन बांट रही है, जबकि वास्तव में सोसायटियों में खाद उपलब्ध ही नहीं है. इसके अलावा मूंग, गेहूं और सोयाबीन की सरकारी खरीदी सही तरीके से न होने के कारण किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का लाभ नहीं मिल पा रहा है.
दूसरी तरफ, राज्य के कृषि मंत्री ने विपक्ष के इन आरोपों पर पलटवार करते हुए दावा किया कि मध्य प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है और जिन भी किसानों को टोकन जारी किए गए हैं, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाएगी. हालांकि, जमीनी हकीकत में खाद के लिए सोसायटियों के बाहर किसानों की लंबी कतारें देखी जा रही हैं.
यह भी पढ़ें: Datia By-Election: दतिया में फिर नरोत्तम समर्थकों पर FIR, अब क्या करेंगे नरोत्तम मिश्रा?
ADVERTISEMENT


