Vidwan Janata Party News: मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नया और अनोखा मोड़ देखने को मिल रहा है. अपनी मांगों और नियमितीकरण की लड़ाई लड़ रहे सरकारी कॉलेजों के अतिथि विद्वानों ने अब सीधे चुनावी मैदान में उतरने का मन बना लिया है. सांकेतिक गठन के बाद अब 'विद्वान जनता पार्टी' (VJP) ने अपना 15 सूत्रीय एजेंडा और सफेद कमल का चुनाव चिन्ह आधिकारिक तौर पर जारी कर दिया है.
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15 सूत्रीय एजेंडे में संविदा और आउटसोर्स कर्मचारी भी शामिल
विद्वान जनता पार्टी (VJP) के फाउंडर और अतिथि विद्वान संघ समिति के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राकेश कुमार सिंह ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पार्टी का एजेंडा और लोगो जारी किया. पार्टी का मुख्य एजेंडा अतिथि विद्वानों का नियमितीकरण है, लेकिन इसमें वर्ग-1, वर्ग-2, वर्ग-3 के अतिथि शिक्षकों, संविदा कर्मचारियों, स्वास्थ्य विभाग के आउटसोर्स और ठेका कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है. पार्टी का कहना है कि उनका मकसद राजनीति में शिक्षित युवाओं की भागीदारी बढ़ाना और सरकारी व्यवस्था से भ्रष्टाचार व भाई-भतीजावाद को खत्म करना है.
क्या है 'फॉल एंड आउट' प्रक्रिया का विवाद?
अतिथि विद्वानों की सबसे बड़ी चिंता 'फॉल एंड आउट' प्रक्रिया को लेकर है. नियम के मुताबिक, यदि किसी कॉलेज में नियमित प्राध्यापक की नियुक्ति या तबादला होता है, तो वहां पहले से कार्यरत अतिथि विद्वान को तुरंत हटा दिया जाता है. विद्वानों की मांग है कि जब तक उनके नियमितीकरण की स्थायी नीति नहीं बनती, तब तक इस प्रक्रिया को तुरंत प्रभाव से रोका जाए.
मंत्री के चैलेंज के बाद बनी पार्टी
बताया जा रहा है कि हाल ही में जब अतिथि विद्वान अपनी मांगों को लेकर उच्च शिक्षा मंत्री इंद्र सिंह परमार से मिले थे, तो कथित तौर पर मंत्री ने उन्हें चुनौती दी थी कि अगर वे सरकार से खुश नहीं हैं तो अपनी पार्टी बनाकर चुनाव लड़ लें. भोपाल में मंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों ने इस चुनौती को स्वीकार किया और VJP का गठन कर दिया.
3 अक्टूबर की डेडलाइन, 30 सितंबर से सदस्यता अभियान
विद्वान जनता पार्टी 30 सितंबर से पूरे प्रदेश में अपना सदस्यता अभियान शुरू करने जा रही है. पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट किया है कि यदि 3 अक्टूबर तक सरकार ने उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया, तो वे 4 अक्टूबर से प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन करेंगे और आगामी चुनावों में सीधे प्रत्याशी उतारेंगे. साथ ही मांग न पूरी होने पर उच्च शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की जाएगी.
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