मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के आमला से एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है. यहां एक कपड़ा कारोबारी की 37 साल की पत्नी रंजीता यादव की अपने ही घर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. घटना के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा हुआ है. मृतका रंजीता ने करीब दो महीने पहले ही अपनी दूसरी बेटी को जन्म दिया था. इस घटना के बाद रंजीता की 10 साल की बड़ी बेटी और 2 महीने की मासूम बच्ची के सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ गया है. वहीं, मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर गंभीर आरोप लगाते हुए मामले को तूल दे दिया है.
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बाथरूम में मिला शव
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, यह पूरी घटना आमला स्थित यादव परिवार के घर की है. रंजीता घर के बाथरूम में गई थीं, लेकिन जब काफी देर तक वह बाहर नहीं आईं तो परिजनों को शक हुआ. आवाज लगाने पर भी जब अंदर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली, तो परिवार के लोगों ने दरवाजा तोड़ा और उन्हें बाहर निकाला. रंजीता को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन वहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है.
बड़ी बहन का आरोप
यह मामला उस समय और गंभीर हो गया जब रंजीता की बड़ी बहन विजेता यादव (जो पेशे से कॉलेज प्रोफेसर हैं) ने मीडिया के सामने आकर ससुराल पक्ष पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के बेहद गंभीर आरोप लगाए. विजेता यादव का कहना है:
"मेरी बहन को लंबे समय से मानसिक रूप से परेशान किया जा रहा था. अभी 2 महीने पहले ही उसका सिजेरियन ऑपरेशन (सीजर डिलीवरी) हुआ था, लेकिन उसे पर्याप्त आराम भी नहीं करने दिया जाता था और लगातार घरेलू काम कराए जाते थे. साल 2022 में छोटे बेटे की शादी के बाद घर का माहौल पूरी तरह बदल गया था. छोटी बहू (मुस्कान यादव) का परिवार राजनीतिक रूप से प्रभावशाली है, इसलिए घर में उसी की चलती थी और मेरी सीधी-सादी बहन पर सारा बोझ डाल दिया गया था. उसकी सास पुष्पा यादव, ससुर सुरेंद्र यादव और देवरानी मुस्कान यादव ने मिलकर मेरी बहन का जीना मुश्किल कर दिया था."
विजेता ने यह भी आरोप लगाया कि शादी के वक्त उनके जीजा प्रशांत यादव को नागपुर में सॉफ्टवेयर इंजीनियर बताया गया था, जबकि बाद में यह जानकारी झूठी निकली और वह आमला में ही कपड़े की दुकान चलाते हैं.
ससुर की सफाई
दूसरी तरफ, रंजीता के ससुर सुरेंद्र यादव (जो भारतीय रेलवे से रिटायर्ड लोको पायलट हैं) ने मायके पक्ष के सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. उन्होंने अपनी सफाई में कहा:
"हमने कभी बहू को किसी तरह की कोई यातना नहीं दी. हमारे घर में 8 साल से बड़ी बहू ही सब संभाल रही थी. घटना वाले दिन 2 महीने की बच्ची की तबीयत थोड़ी ठीक नहीं थी. रंजीता ने बच्ची की मालिश करवाई, खुद खाना खाया और फिर कमरे के अंदर चली गई. जब बच्ची रोने लगी तो हम उसे बुलाने गए, लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं आया. फिर हमने दरवाजा तोड़ा. हमारी बहू पिछले 10 सालों से डिप्रेशन का इलाज करा रही थी. पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद सच सबके सामने आ जाएगा."
पुलिस कर रही है हर एंगल से जांच
पुलिस का कहना है कि मामला दर्ज कर लिया गया है और हर पहलू की बारीकी से जांच की जा रही है. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पोस्टमार्टम (PM) रिपोर्ट, घटनास्थल से मिले साक्ष्य और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी. अगर जांच में मानसिक प्रताड़ना या आत्महत्या के लिए उकसाने के सबूत मिलते हैं, तो दोषियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा.
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