मध्य प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों राजनीतिक पारा पूरी तरह से गरमाया हुआ है. राज्य की राजनीति में इस समय दो बड़े मुद्दों पर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है. पहला मुद्दा है मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लागू करना और दूसरा मुद्दा है मोहन सरकार के कैबिनेट का विस्तार. इन दोनों ही बड़े मुद्दों के बीच मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अचानक राज्यपाल मंगूभाई पटेल से मुलाकात की है. राजभवन में हुई इस अचानक मुलाकात ने राज्य में सियासी कयासों के बाजार को और अधिक गर्म कर दिया है. इस मुलाकात को केवल एक शिष्टाचार भेंट के रूप में नहीं, बल्कि राज्य के इन दोनों बड़े राजनीतिक घटनाक्रमों से जोड़कर देखा जा रहा है.
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मानसून सत्र में UCC बिल लाने की तैयारी
कहा जा रहा है कि मध्य प्रदेश की मोहन सरकार राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने का मन पूरी तरह से बना चुकी है. सरकार की योजना आगामी मानसून सत्र में ही यूसीसी (UCC) से जुड़ा बिल विधानसभा में पेश करने की है. इसके लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पहले ही एक हाई लेवल कमेटी का गठन किया था, जिसने आम जनता से इस कानून को लेकर सुझाव मांगे थे. सरकार का दावा है कि इस कमेटी को जनता की तरफ से लगभग 9 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए हैं, जिनमें सबसे बड़ी संख्या महिलाओं की है. इस हाई लेवल कमेटी ने भाजपा शासित अन्य राज्यों जैसे उत्तराखंड, असम और गुजरात में लागू या तैयार किए गए यूसीसी नियमों का गहन अध्ययन किया है और उसी के आधार पर मध्य प्रदेश के लिए भी नियम-कायदे तैयार किए गए हैं.
राज्यपाल को सौंपी रिपोर्ट और आगामी योजना
राज्यपाल मंगूभाई पटेल से मुलाकात के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुलाकात की तस्वीरें साझा की हैं. सीएम ने बताया कि उन्होंने लोक भवन भोपाल में राज्यपाल से भेंट की और उन्हें प्रदेश में समान नागरिक संहिता लागू करने को लेकर मिले 9 लाख से अधिक सुझावों, व्यापक जनसमर्थन और सरकार की आगामी कार्य योजना से अवगत कराया. इसके साथ ही, इस बैठक में जलगंगा संवर्धन अभियान के सफल क्रियान्वयन, गुरु पूर्णिमा पखवाड़ा में प्रस्तावित शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों, राज्य की चार कृषि उपजों को मिले जीआई टैग से किसानों को होने वाले लाभ, सौर ऊर्जा परियोजना के विस्तार और एमएसएमई व स्टार्टअप को प्रोत्साहन देकर रोजगार सृजन करने जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा की गई.
कैबिनेट विस्तार की अटकलें हुईं तेज
भले ही मुख्यमंत्री ने इस मुलाकात को यूसीसी और सरकारी योजनाओं की समीक्षा से जुड़ा बताया हो, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे मंत्रिमंडल के विस्तार से भी जोड़कर देख रहे हैं. मध्य प्रदेश में काफी समय से मंत्रिमंडल विस्तार की अटकलें चल रही हैं और माना जा रहा है कि मानसून सत्र की शुरुआत से पहले मोहन कैबिनेट का विस्तार किया जा सकता है. वर्तमान में कैबिनेट में तीन मंत्री पद खाली पड़े हैं, जिन्हें भरने को लेकर चर्चाएं तेज हैं. गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि इस फेरबदल में कुछ मंत्रियों की छुट्टी की जा सकती है और कई नए चेहरों को मौका मिल सकता है. हालांकि, कुछ नेताओं जैसे रीति पाठक ने पहले ही सोशल मीडिया के माध्यम से इन कयासों को महज अफवाह बताया है, लेकिन इस मुलाकात के बाद अंदरखाने चर्चाएं और तेज हो गई हैं.
यूसीसी को लेकर विपक्ष का विरोध और सरकार का दावा
एक तरफ जहां सरकार यूसीसी को जल्द से जल्द कानून का रूप देने के लिए तत्पर दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार सरकार को घेरने में जुटा हुआ है. विपक्ष का मुख्य विरोध और चिंता राज्य की आदिवासी और जनजातीय आबादी को लेकर है. विपक्ष का आरोप है कि यूसीसी लागू होने से आदिवासियों की अपनी विशेष परंपराओं और संस्कृति पर असर पड़ सकता है. वहीं इसके उलट सरकार और मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने बयानों में साफ कर चुके हैं कि मध्य प्रदेश में यूसीसी हर हाल में लागू होकर रहेगा और इसे तैयार करते समय आदिवासियों के हितों का पूरा ध्यान रखा जा रहा है. अब देखना दिलचस्प होगा कि मानसून सत्र से पहले क्या कैबिनेट का विस्तार होता है और सरकार किस तरह से विपक्ष के विरोध के बीच यूसीसी बिल को सदन में पास कराती है.
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