MP Congress: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने पर भड़के कांग्रेस विधायक, अपनी ही पार्टी की खोल दी पोल!

MP Congress News: मध्य प्रदेश में मीनाक्षी नटराजन का राज्यसभा नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस के भीतर नाराजगी खुलकर सामने आ गई है. हरदा से कांग्रेस विधायक डॉ. आर के दोगने ने अपनी ही पार्टी की व्यवस्थाओं पर सवाल उठाते हुए बड़ी चूक स्वीकार की. डमी कैंडिडेट नहीं उतारने, विधायकों की बाड़ेबंदी और एयरपोर्ट पर हुई अव्यवस्था को लेकर उन्होंने आलाकमान को खुली नसीहत दी.

Madhya Pradesh Politics
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस पर ही भड़क उठे विधायक.

लोमेश कुमार गौर

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मध्य प्रदेश की राजनीति में हुए बड़े उलटफेर और कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद अब कांग्रेस के भीतर से ही असंतोष और नाराजगी के स्वर खुलकर सामने आने लगे हैं. हरदा से कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. आर के दोगने ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी ही पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और व्यवस्थाओं पर तीखे सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में स्वीकार किया कि इस पूरे मामले में कांग्रेस से बहुत बड़ी गलतियां हुई हैं, जिससे न केवल विधायकों की फजीहत हुई बल्कि पार्टी की छवि को भी भारी नुकसान पहुंचा है. विस्तार से जानिए पूरा मामला.

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कांग्रेस की 'बड़ी गलतियों' पर बेबाक बोल

कांग्रेस विधायक डॉ. आर के दोगने ने इस पूरे घटनाक्रम पर बेबाकी से बात करते हुए कहा कि बीते कल जो कुछ भी हुआ, उसमें हमारी तरफ से बहुत बड़ी गलतियां हुई हैं. ऐसा घटनाक्रम किसी भी सूरत में नहीं होना चाहिए था. उन्होंने कहा कि विधायकों को पांच-पांच घंटे तक एयरपोर्ट पर रोक कर रखना सुरक्षा की दृष्टि से भी बिल्कुल ठीक नहीं है और यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. दोगने ने नाराजगी जताते हुए कहा कि चाहे गलती सरकार की हो या हमारे नेताओं की, दोनों पक्षों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए था कि जन प्रतिनिधियों को इस तरह किसी भी प्लेटफार्म पर लावारिस नहीं छोड़ा जाना चाहिए.

एयरपोर्ट पर परिवार और बच्चों का हुआ अपमान

कल के घटनाक्रम के दौरान चेहरे पर दिखे गुस्से की वजह बताते हुए विधायक आर के दोगने ने कहा कि कल सभी विधायक बेहद गुस्से में थे क्योंकि पांच घंटे तक उन्हें एयरपोर्ट के अंदर तक नहीं घुसने दिया गया और लोग बाहर ही बैठे रहे. उन्होंने बताया कि सभी विधायक 10 दिन के लंबे दौरे की तैयारी के हिसाब से अपने छोटे-छोटे बच्चों और पत्नी के साथ आए थे. इस भीषण गर्मी और बढ़े हुए तापमान में विधायकों के परिवार और बच्चे बैग लेकर बाहर बैठे रहे. उन्होंने तल्ख लहजे में कहा कि जब एक जनप्रतिनिधि को एयरपोर्ट में एंट्री तक न मिले, तो इससे बड़ा अपमान और पार्टी की छवि का नुकसान भला और क्या हो सकता है.

इंदौर की घटना से नहीं लिया सबक, डमी फॉर्म न भरना बड़ी चूक

जब विधायक से पूछा गया कि क्या इंदौर लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी द्वारा अचानक नामांकन वापस लेने जैसी घटनाओं से वरिष्ठ नेताओं ने सबक नहीं लिया, तो उन्होंने साफ तौर पर माना कि यहां भी हमसे बड़ी चूक हुई है. उन्होंने कहा कि मीनाक्षी नटराजन के साथ किसी न किसी अन्य नेता का डमी कैंडिडेट के तौर पर फॉर्म जरूर भरा जाना चाहिए था. अगर डमी कैंडिडेट का फॉर्म भरा होता, तो आज यह परिस्थिति पैदा ही नहीं होती. बार-बार हो रही इन गलतियों पर उन्होंने कहा कि गलतियों से हालांकि सीखने को मिलता है, लेकिन इस बार व्यवस्थाओं में बड़ी लापरवाही हुई है.

मीनाक्षी नटराजन का फॉर्म रिजेक्ट करना अन्याय

मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के तकनीकी कारणों पर बात करते हुए डॉ. आर के दोगने ने कहा कि यह कोई इतना गंभीर मामला नहीं था. उन्हें सिर्फ एक नोटिस की सूचना आई थी कि आपके विरुद्ध कुछ चीजें हो सकती हैं, जिसमें एक महिला द्वारा लगाए गए आरोप में सहयोग करने की बात थी. विधायक ने तर्क दिया कि यह कोई ऐसा अपराध या आरोप नहीं है जिसके आधार पर फॉर्म रद्द कर दिया जाए. उन्होंने कहा कि आज तक किसी भी प्रत्याशी ने सिर्फ नोटिस मिलने की जानकारी फॉर्म में नहीं दी है, हमेशा एफआईआर, सजा या कोर्ट में चल रहे केस की जानकारी दी जाती है. नोटिस के आधार पर फॉर्म रिजेक्ट करना सरासर गलत और सरासर अन्याय है.

विधायकों की बाड़ेबंदी का सख्त विरोध

पार्टी द्वारा विधायकों पर भरोसा न होने और उनकी बाड़ेबंदी किए जाने के सवाल पर डॉ. आर के दोगने ने बेहद कड़ा रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि मैं किसी भी राजनीतिक दल द्वारा विधायकों की बाड़ेबंदी किए जाने का सख्त विरोधी हूं. उन्होंने मांग की कि देश के संविधान में ऐसा कड़क कानून बनना चाहिए कि अगर कोई जनप्रतिनिधि दलबदल करे तो उसी वक्त उसकी सदस्यता खत्म हो जाए ताकि बाड़ेबंदी की नौबत ही न आए. उन्होंने कहा कि एक विधायक के पीछे ढाई लाख की जनता का विश्वास होता है और विधायक का प्रोटोकॉल चीफ सेक्रेटरी से भी ऊपर होता है. ऐसे में विधायकों को बंधक बनाकर रखना जनता का और लोकतंत्र का अपमान है. अगर इसे स्वीकार किया गया तो देश में तानाशाही आ जाएगी.

आलाकमान को प्लानिंग से काम करने की सलाह

पूरे घटनाक्रम के बाद कांग्रेस आलाकमान को संदेश देते हुए विधायक ने कहा कि मेरा सरकार और अपनी पार्टी दोनों से निवेदन है कि इस बाड़ेबंदी वाले सिस्टम पर पूरी तरह कंट्रोल होना चाहिए. इसके साथ ही उन्होंने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को नसीहत दी कि भविष्य में जब भी कोई इतनी बड़ी योजना बनाई जाए, तो ऊपरी तौर पर कागजी प्लानिंग करने के बजाय जमीन पर उसकी पूरी तैयारी की जाए, प्रॉपर मैनेजमेंट किया जाए और तभी अगला कदम उठाया जाए ताकि आगे से पार्टी को इस तरह की फजीहत और अपमान का सामना न करना पड़े.

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