MP Election 2023: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव को अब महज 5 महीने का वक्त बचा है. इसके लिए कांग्रेस की रणनीति तैयार है. किस विधानसभा सीट पर कौन उम्मीदवार होगा, इसके लिए कई स्तर पर सर्वे कराया जा रहा है. दिग्विजय सिंह ने दो दिन पहले कहा था कि कमलनाथ का सर्वे ही पत्थर की लकीर है और वह ही सर्वे-सर्वा हैं. जब इसे लेकर कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ सवाल किया गया तो उन्होंने खुलासा कर ही दिया कि विधानसभा का टिकट किसे मिलेगा और इसका आधार क्या होगा. कमलनाथ ने कहा, “हेलीकॉप्टर लैंडिंग किसी की नहीं होगी. सर्वे और स्थानीय लोगों की राय हमारे लिए बेहद अहम रहेगी और वही आधार होगा टिकट देने का.”
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कमलनाथ बोले- ‘सर्वे करने का पहला सिस्टम था, पुराना सिस्टम अब काम नहीं करेगा. पहले कोई ये सुझाव दे दे, कोई वो सुझाव दे दे. कोई ये दबाव बना दे, लेकिन अब हम हम नए सिरे स्वतंत्र से सर्वे करा रहे हैं. एआईसीसी भी सर्वे करवा रही है. सर्वे में बहुत सारी चीजें कॉमन होती हैं. कहीं दो-दो, तीन-तीन सर्वे कराए जाएंगे, एक नहीं पता कि दूसरे का क्या सर्वे है. कई कॉमन निकलती हैं तो कहीं विपरीत भी होती हैं. तब हम सबसे ज्यादा महत्व स्थानीय लोगों को देना चाहते हैं, उनकी राय क्या है. मतलब साफ है कि हम स्थानीय व्यक्ति की राय के बगैर हम कुछ नहीं करने वाले.’
कमलनाथ ने आगे कहा, ‘सर्वे एक इशारा होता है और स्थानीय व्यक्ति की राय जाने बगैर हम कोई फैसला नहीं करेंगे. अंत में वही मैदान में है. किसी एक टिकट पर सर्वसहमति नहीं होती है. मेरे पास साढ़े तीन हजार आवेदन आए हैं और कोई नहीं कहता है कि मैं हारने वाला हूं. सब कहते हैं मैं जीतने वाला हूं.’
टिकट बंटवारे को लेकर क्या बोले कमलनाथ…
कांग्रेस करा रही है स्वतंत्र सर्वे: कमलनाथ
कमलनाथ ने कहा कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए उनकी एक स्वतंत्र सर्वे करा रही है. कमलनाथ ने कहा कि इस सर्वे से राज्य में पार्टी को उम्मीदवारों के चयन में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा कि पार्टी उम्मीदवार चयन प्रक्रिया के तहत कांग्रेस स्थानीय लोगों की राय को ज्यादा महत्व देगी. कमलनाथ ने साफ कर दिया है कि इस बार टिकट किसी की सिफारिश में नहीं मिलेगा. टिकट लेना जनता के सर्वे के आधार पर ही मिलेगा.
दावेदार कभी नहीं कहता वह हारेगा: कांग्रेस अध्यक्ष
कमलनाथ ने कहा कि सर्वे एक तरह का इशारा करता है कि विधानसभा चुनाव में किसे टिकट देना है. उन्होंने कहा कि मेरे पास साढ़े 3 हजार आवेदन आए हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में भी आवेदन आए थे. उन्होंने कहा कि टिकट वितरण की कोई भी प्रक्रिया आम सहमति के आधार पर पूरी नहीं की जा सकती, क्योंकि चुनाव लड़ने की चाहत रखने वाला कोई व्यक्ति नहीं कहता कि वह हारने वाला है, सभी दावा करते हैं कि वे जीतने वाले हैं.
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