मध्य प्रदेश में साल 2027 में होने वाले नगर निकाय (नगर निगम और नगर पालिका) चुनावों को लेकर मुख्यमंत्री मोहन यादव की सरकार अभी से पूरी तरह एक्शन मोड में आ गई है. भले ही इन चुनावों में अभी समय बाकी है, लेकिन सरकार ने जमीनी स्तर पर अपनी चुनावी बिसात बिछानी शुरू कर दी है. इसी कड़ी में मोहन सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए महापौर (Mayor) और नगर पालिका अध्यक्ष पदों के आरक्षण (Reservation) की जिम्मेदारी तय कर दी है.
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आयुक्त को सौंपी गई आरक्षण की कमान
नगरीय विकास और आवास विभाग द्वारा जारी किए गए ताजा आदेश के मुताबिक, अब महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष पदों के लिए आरक्षण की कार्यवाही कराने का जिम्मा आयुक्त, नगरीय प्रशासन और विकास विभाग को सौंपा गया है. उन्हें इसके लिए अधिकृत अधिकारी घोषित किया गया है. यह पूरी प्रक्रिया 'मध्य प्रदेश नगर पालिका (महापौर और अध्यक्ष के पद का आरक्षण) नियम 1999' के प्रावधानों के अंतर्गत पूरी की जाएगी. राज्य सरकार ने 12 जून को इसके आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए हैं.
समय से पहले तैयारी की वजह?
आमतौर पर देखा जाता है कि चुनाव के ठीक पहले आरक्षण को लेकर कई कानूनी पेच और राजनीतिक विवाद खड़े हो जाते हैं. इसी से बचने के लिए मोहन यादव सरकार ने समय रहते (करीब डेढ़ साल पहले) ही आदेश जारी कर दिए हैं ताकि पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से और समय पर पूरा किया जा सके.
एक तरफ जहां सरकार प्रशासनिक स्तर पर आरक्षण के नियम तय कर रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्य निर्वाचन आयोग भी एक्टिव हो गया है. चुनाव आयोग ने नगरीय निकायों की नई और अपडेटेड मतदाता सूची (Voter List) तैयार करने का काम शुरू कर दिया है ताकि एन वक्त पर कोई गड़बड़ी न हो.
क्या थे 2022 के चुनावी समीकरण?
साल 2022 में हुए नगर निगम चुनावों में बीजेपी को बड़ी सफलता मिली थी. सूबे के कुल 16 नगर निगमों में से:
- बीजेपी (BJP): 10 सीटों पर जीत दर्ज की थी.
- कांग्रेस (Congress): 5 सीटों पर सिमट गई थी.
- आम आदमी पार्टी (AAP): सिंगरोली सीट जीतकर पहली बार अपना खाता खोला था.
बदला समीकरण
चुनाव के बाद राजनीतिक उठापटक के चलते जबलपुर, मुरैना और छिंदवाड़ा के मेयर कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. इस दलबदल के बाद वर्तमान में 16 में से 13 नगर निगमों पर बीजेपी के महापौर का कब्जा है.
राज्यसभा की तीन सीटों पर जीत के बाद अब बीजेपी का पूरा फोकस जमीनी स्तर के इन चुनावों पर टिक गया है. सरकार की इस समय से पहले की तैयारी के बाद अब देखना होगा कि विपक्ष इस पर क्या रणनीति अपनाता है
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