मध्य प्रदेश में भी दौड़ेंगी अब सरकारी बसें, सीएम मोहन यादव देंगे 351 नई बसों की सौगात

आशुतोष शुक्ला

• 08:22 PM • 24 Sep 2026

मध्यप्रदेश में 25 सितंबर से शुरू हो रही है 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा'. सीएम मोहन यादव भोपाल के दशहरा मैदान से 351 हाई-टेक बसों को हरी झंडी दिखाएंगे. जानिए रूट, शहरों के आंकड़े और सुरक्षा फीचर्स.

Dr. Mohan Yadav
मुख्यमंत्री कर रहे हैं बस का निरीक्षण
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भोपाल :  मध्यप्रदेश के नागरिकों के लिए सार्वजनिक परिवहन के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगामी 25 सितंबर को राजधानी भोपाल के ऐतिहासिक दशहरा मैदान से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 'मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा' का भव्य शुभारंभ करेंगे। पहले चरण में प्रदेश की सड़कों पर 351 आधुनिक बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा. 

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यह योजना न केवल शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच की दूरी कम करेगी, बल्कि हाई-टेक सुरक्षा इंतजामों के साथ प्रदेश में सुरक्षित और आरामदायक सफर की नई नींव भी रखेगी. 

पहले चरण में 351 बसें: 120 इंटर-सिटी और 231 इंट्रा-सिटी 

सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत शुरुआती चरण में रवाना होने वाली 351 बसों को दो प्रमुख श्रेणियों में बांटा गया है:

120 'इंटर-सिटी' बसें: दो या दो से अधिक प्रमुख शहरों के बीच तेज और निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी.

231 'इंट्रा-सिटी' बसें: शहरों की सीमाओं के भीतर आम जनता को किफायती और सुलभ यातायात सेवा मुहैया कराएंगी.

किस शहर को मिलेगी कितनी बसें? (प्रथम चरण का ब्रेकअप)

प्रथम चरण में राज्य के 7 प्रमुख शहरों में बसों का परिचालन शुरू किया जा रहा है:

  • इंदौर: कुल 145 बसें (50 इंटर-सिटी, 95 इंट्रा-सिटी)
  • भोपाल: कुल 106 बसें (23 इंटर-सिटी, 83 इंट्रा-सिटी)
  • जबलपुर: कुल 67 बसें (14 इंटर-सिटी, 53 इंट्रा-सिटी)
  • रीवा: 18 इंटर-सिटी बसें
  • देवास: 10 इंटर-सिटी बसें
  • कटनी: 3 इंटर-सिटी बसें
  • भिंड: 2 इंटर-सिटी बसें

हाई-टेक सुरक्षा: महिलाओं और बच्चों के सफर पर विशेष ध्यान 

सफर को सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है। हर बस में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं:

  1. सुरक्षा निगरानी: प्रत्येक बस में 07 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं.
  2. इमरजेंसी सुविधा: आपात स्थिति के लिए पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम मौजूद रहेगा.
  3. पैसेंजर इनफॉरमेशन सिस्टम: यात्रियों को बस की स्थिति की सटीक जानकारी देने के लिए डिस्प्ले व अनाउंसमेंट सिस्टम लागू किया गया है.
  4. कमांड-कंट्रोल सेंटर: मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी 7 सहायक कंपनियों द्वारा 24x7 मॉनिटरिंग के लिए अत्याधुनिक कमांड सेंटर स्थापित किए गए हैं, जो इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के जरिए बसों की रफ्तार, समय और लोकेशन पर पैनी नजर रखेंगे.

2031 तक का विजन: 75% ग्राम पंचायतें होंगी कनेक्ट 

मध्यप्रदेश सरकार का लक्ष्य इस योजना को सिर्फ शहरों तक सीमित रखना नहीं है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना भी है:

  • ग्रामीण कनेक्टिविटी: वर्ष 2031 तक राज्य की 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ा जाएगा.
  • विशाल नेटवर्क: भविष्य में प्रदेशभर में 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें चलाने का लक्ष्य है, जिससे रोजाना 30 लाख से अधिक यात्री लाभान्वित होंगे.
  • इंफ्रास्ट्रक्चर का कायाकल्प: 180 से अधिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा.
  • ग्रीन एनर्जी पर फोकस: पर्यावरण संरक्षण के लिए इलेक्ट्रिक (EV) और स्वच्छ ईंधन वाली बसों को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि कार्बन उत्सर्जन को न्यूनतम स्तर पर लाया जा सके.

PPP मॉडल से रोजगार और निवेश के खुलेंगे द्वार 

योजना के क्रियान्वयन के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल अपनाया गया है. पारदर्शी अनुबंधों, विज्ञापन (Ads) और कार्गो सेवाओं जैसे नॉन-फेयर रेवेन्यू मॉडल से निजी ऑपरेटरों को प्रोत्साहन मिलेगा. इसके अलावा, इलेक्ट्रिक वाहन निर्माण, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट और आईटी सेवाओं के क्षेत्र में हजारों युवाओं के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे.