देश में जहां एक तरफ सरकारी नौकरी पाने के लिए लाखों युवाओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है और एक-एक पद के लिए हजारों आवेदन आते हैं, वहीं मध्य प्रदेश के सीधी जिले से एक बेहद हैरान और हैरान करने वाली खबर सामने आई है. यहां वन विभाग द्वारा निकाली गई वनरक्षक (Forest Guard) की भर्ती में मैदान पर परीक्षा देने के लिए सिर्फ एक महिला अभ्यर्थी पहुंची. नतीजा यह हुआ कि उसने सभी शारीरिक टेस्ट पास किए और उसका चयन हो गया, जबकि बाकी के 7 पद खाली रह गए.
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विशेष आदिम जनजातियों के लिए निकाली गई थी भर्ती
यह पूरा मामला मध्य प्रदेश के सीधी जिले का है, जहां वन विभाग ने विशेष पिछड़ी आदिम जनजातियों- बैगा, भारिया और सहारिया समुदाय के युवाओं के लिए वनरक्षकों की विशेष सीधी भर्ती का आयोजन किया था. विभाग की तरफ से कुल 8 पदों के लिए विज्ञापन जारी किया गया था.
नियमों के मुताबिक ऑनलाइन आवेदन के बाद विभाग ने स्क्रूटनी की और कुल 25 पात्र अभ्यर्थियों को दस्तावेजों की जांच, शारीरिक मापजोख और पैदल चाल परीक्षा के लिए कॉल लेटर (प्रवेश पत्र) भेजा था.
मैदान का नजारा देख अधिकारी भी रह गए हैरान
23 जून को रीवा और सीधी वन मंडल के आला अधिकारियों की मौजूदगी में चयन प्रक्रिया शुरू हुई. अधिकारियों को उम्मीद थी कि सभी 25 अभ्यर्थी परीक्षा देने पहुंचेंगे, लेकिन जब मैदान का नजारा देखा तो अधिकारी भी दंग रह गए. 25 लोगों को कॉल लेटर भेजे जाने के बावजूद मैदान पर केवल एक महिला अभ्यर्थी ही परीक्षा देने पहुंची.
दिलचस्प बात यह है कि परीक्षा देने पहुंची यह महिला अभ्यर्थी भी सीधी जिले की नहीं, बल्कि उमरिया जिले की रहने वाली थी. महिला अभ्यर्थी ने नियमों के मुताबिक तय 15 किलोमीटर की पैदल चाल और सभी शारीरिक मानकों (Physical Tests) को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिसके बाद उसका चयन पक्का हो गया.
अगले दिन पुरुषों की दौड़ में नहीं आया कोई अभ्यर्थी
महिला अभ्यर्थी की परीक्षा के अगले दिन पुरुष अभ्यर्थियों की बारी थी. पुरुषों के लिए नियमों के मुताबिक 25 किलोमीटर की पैदल चाल का टेस्ट होना था. अधिकारियों की टीम मैदान पर मुस्तैद थी, लेकिन पूरे दिन इंतजार करने के बाद भी एक भी पुरुष अभ्यर्थी परीक्षा स्थल पर नहीं पहुंचा. इसके चलते कुल 8 पदों में से सिर्फ 1 पद भरा जा सका और 7 पद रिक्त रह गए.
वन मंडलाधिकारी (DFO) ने क्या कहा?
इस पूरे अनोखे मामले पर जब सीधी की वन मंडलाधिकारी (DFO) प्रीति अहिरवार से बात की गई तो उन्होंने बताया, "शासन के निर्धारित नियमों के तहत पूरी पारदर्शिता के साथ यह चयन प्रक्रिया आयोजित की गई थी. ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से हमने शॉर्टलिस्टेड 25 अभ्यर्थियों को बुलाया था, लेकिन केवल एक ही महिला अभ्यर्थी उपस्थित हुईं. उन्होंने सभी आवश्यक प्रक्रियाएं और शारीरिक टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए, इसलिए उनका चयन किया गया है. बाकी पदों को रिक्त छोड़ दिया गया है."
भर्ती में युवाओं की बेरुखी ने खड़े किए बड़े सवाल
आज के दौर में जब एक अदद सरकारी नौकरी के लिए युवाओं में मारामारी मची रहती है, ऐसे में विशेष आदिम जनजातियों के कल्याण के लिए चलाए गए इस विशेष भर्ती अभियान में युवाओं की यह बेरुखी प्रशासन और समाजसेवियों के लिए चिंता और चिंतन का विषय बन गई है.
जहां एक तरफ उमरिया की इस अकेली महिला अभ्यर्थी के हौसले और उसकी कामयाबी की चौतरफा तारीफ हो रही है, वहीं इस घटना ने प्रशासन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह उठ रहा है कि क्या सुदूर और सुदूरवर्ती इलाकों में रहने वाले आदिम जनजाति के युवाओं तक इस भर्ती की जानकारी सही समय पर नहीं पहुंच पाई? या फिर इन इलाकों में जागरूकता की इतनी कमी रह गई कि युवाओं ने इतनी बड़ी सरकारी नौकरी के मौके को आसानी से गंवा दिया.
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