भोपाल/इंदौर: मध्य प्रदेश की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का नया केंद्र इंदौर का ऐतिहासिक 'डेली कॉलेज' बन गया है. पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के एक बयान से शुरू हुई बहस जब केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के पलटवार तक पहुँची, तो बात इतिहास के पन्नों तक जा पहुँची. दरअसल, दिग्विजय सिंह ने डेली कॉलेज परिसर में आयोजित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम पर सवाल उठाते हुए तंज कसा था कि संघ के कार्यक्रम 'सिंधिया स्कूल' में कराए जाने चाहिए. इस पर कड़ा पलटवार करते हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया ने दावा किया कि दिग्विजय सिंह को यह नहीं भूलना चाहिए कि डेली कॉलेज का निर्माण भी सिंधिया परिवार के योगदान से ही हुआ था. दिलचस्प बात यह भी है कि खुद दिग्विजय सिंह और उनके भाई लक्ष्मण सिंह डेली कॉलेज के पूर्व छात्र (Alumni) रहे हैं. सिंधिया के इस दावे के बाद अब 118 एकड़ में फैले इस भव्य संस्थान की स्थापना और इसके निर्माण का इतिहास एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है.
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1870 में पड़ी थी परिकल्पना की नींव
ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, डेली कॉलेज की परिकल्पना वर्ष 1870 में ब्रिटिश रेजीडेंट सर हेनरी डेली और ग्वालियर के तत्कालीन महाराजा जयाजीराव सिंधिया के बीच हुई ऐतिहासिक चर्चा से शुरू हुई थी. इसका उद्देश्य मध्य भारत के रियासती परिवारों के लिए एक उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान स्थापित करना था. 20वीं शताब्दी की शुरुआत में 118 एकड़ के परिसर का निर्माण कार्य शुरू हुआ, जिसे पूरा होने में करीब 15 साल लगे और वर्ष 1916 में इसका भव्य उद्घाटन हुआ.
किस राजपरिवार का कितना रहा योगदान?
वर्ष 1906 में लंदन में प्रकाशित 'सिविल इंजीनियरिंग रिपोर्ट ऑफ बिल्डिंग' और ऐतिहासिक रिकॉर्ड्स के अनुसार, इस भव्य संस्थान के निर्माण में मध्य भारत की विभिन्न रियासतों ने आर्थिक सहयोग दिया था, लेकिन सबसे बड़ा वित्तीय योगदान सिंधिया राजपरिवार का था:
- ग्वालियर (सिंधिया परिवार): महाराजा श्रीमंत माधो राव सिंधिया ने सर्वाधिक ₹5 लाख का योगदान दिया.
- इंदौर (होलकर परिवार): ₹2 लाख का योगदान.
- रीवा राजपरिवार: ₹1.5 लाख का योगदान.
- आंकड़े- सिंधिया रिसर्च सेंटर के सौजन्य से
आज भी डेली कॉलेज परिसर में स्थित 'ग्वालियर हाउस', 'सिंधिया पवेलियन' और मुख्य हॉल में लगी ऐतिहासिक पेंटिंग्स इस गहरे ऐतिहासिक जुड़ाव की गवाही देती हैं.
शिक्षा क्षेत्र में सिंधिया परिवार का योगदान
शिक्षा के क्षेत्र में सिंधिया राजवंश का योगदान केवल डेली कॉलेज तक ही सीमित नहीं रहा है:
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU): इसके निर्माण में सिंधिया परिवार ने ₹5,25,000 का प्रमुख योगदान दिया था. महाराजा माधो राव सिंधिया BHU के प्रथम प्रो-वाइस चांसलर बने थे.
- अन्य प्रमुख संस्थान: उज्जैन का विक्रम विश्वविद्यालय, ग्वालियर का जीवाजी विश्वविद्यालय, गजरा राजा मेडिकल कॉलेज, माधव इंजीनियरिंग कॉलेज, सिंधिया स्कूल और सिंधिया कन्या विद्यालय जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के विकास में भी सिंधिया परिवार की अहम भूमिका रही है.
राजनीतिक मंचों पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर भले जारी रहे, लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेज और तथ्य इस बात की पुष्टि करते हैं कि इंदौर के डेली कॉलेज की नींव, आर्थिक सहयोग और परिकल्पना में सिंधिया परिवार की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है.
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