MP Politics: बजट सत्र से पहले 3 बड़े मंत्रियों की कुर्सी पर संकट? जीतू पटवारी ने CM मोहन यादव से की बर्खास्तगी की मांग

MP Politics: मध्य प्रदेश में बजट सत्र से पहले सियासत गरमा गई है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर तीन मंत्रियों कैलाश विजयवर्गीय, विजय शाह और राजेंद्र शुक्ला को बर्खास्त करने की मांग की है. जानिए आखिर क्यों की गई यह मांग?

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आशुतोष शुक्ला

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मध्य प्रदेश में 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा के बजट सत्र से पहले सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष (PCC Chief) जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर सरकार के तीन कद्दावर मंत्रियों को तुरंत बर्खास्त करने की मांग की है. पटवारी ने तर्क दिया है कि यदि इन मंत्रियों को नहीं हटाया गया, तो जनता में यह संदेश जाएगा कि सरकार अनैतिकता और देश के अपमान का समर्थन करती है. आइए जानते हैं पूरी कहानी.

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किन 3 मंत्रियों पर गिरी गाज और क्या हैं आरोप?

जीतू पटवारी ने जिन तीन मंत्रियों को निशाने पर लिया है, वे भाजपा के बड़े चेहरे माने जाते हैं:

1. कैलाश विजयवर्गीय (नगरीय प्रशासन मंत्री): जीतू पटवारी का आरोप है कि विजयवर्गीय अपने क्षेत्र इंदौर में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रहे हैं. इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से अब तक 35 लोगों की मौत का दावा किया जा रहा है. इसके अलावा, एक पत्रकार के सवाल पर 'घंटा' दिखाने वाले उनके व्यवहार की भी तीखी आलोचना हो रही है.

2. विजय शाह (जनजातीय कार्य मंत्री): विजय शाह पर भारतीय सेना की एक महिला कर्नल के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है. यह मामला वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, जहां कोर्ट ने सरकार की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है. कांग्रेस का कहना है कि उन्होंने देश की बेटी और सेना का अपमान किया है.

3. राजेंद्र शुक्ला (उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री): विंध्य के कद्दावर नेता राजेंद्र शुक्ला के स्वास्थ्य मंत्री रहते छिंदवाड़ा में जहरीली सिरप पीने से 22 मासूम बच्चों की मौत हो गई. पटवारी का आरोप है कि इस मामले में केवल छोटे स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई, जबकि मुख्य जिम्मेदारी स्वास्थ्य मंत्री की बनती है.

क्या सरकार लेगी कोई एक्शन?

राजनीतिक विश्लेषकों और वरिष्ठ पत्रकारों का मानना है कि विपक्ष की मांग पर सरकार द्वारा इन मंत्रियों को बर्खास्त करने की संभावना बहुत कम है. वरिष्ठ पत्रकार चैतन्य भट्ट के अनुसार, ये तीनों नेता अपनी-अपनी क्षेत्रों में काफी प्रभावशाली हैं और पार्टी के लिए बड़ा वोट बैंक रखते हैं. विजय शाह का मामला कोर्ट में होने के कारण सरकार 'सबजूडिस' होने का तर्क दे सकती है, वहीं कैलाश विजयवर्गीय और राजेंद्र शुक्ला पार्टी के भीतर बेहद मजबूत स्थिति में हैं.

बजट सत्र में हंगामे के आसार

कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि वह बजट सत्र के दौरान इन मुद्दों को सदन में जोर-शोर से उठाएगी. जीतू पटवारी के इस हमले ने मोहन यादव सरकार को रक्षात्मक मुद्रा में ला खड़ा किया है. अब देखना यह होगा कि 16 फरवरी से शुरू हो रहे सत्र में सरकार इन आरोपों का क्या जवाब देती है.

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