MP: राज्यसभा चुनाव से पहले छिंदवाड़ा में बड़ा बवाल! नरेंद्र सिंह तोमर से कांग्रेस के 5 विधायक क्यों मिले ? क्या नकुलनाथ को टिकट दिलाने का है दबाव ?

मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक बार फिर छिंदवाड़ा नाम का सियासी बवंडर उठ खड़ा हुआ है. पहले अटकलें थीं कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद राज्यसभा जा सकते हैं, लेकिन सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर आ रही है कि कमलनाथ खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते,

मध्यप्रदेश में सियासी उठापटक
मध्यप्रदेश में सियासी उठापटक

आशुतोष शुक्ला

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मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों एक बार फिर छिंदवाड़ा नाम का सियासी बवंडर उठ खड़ा हुआ है. मौका आगामी राज्यसभा चुनाव का है, लेकिन बिसात ऐसी बिछी है कि दिल्ली से लेकर भोपाल तक कांग्रेस खेमे के पसीने छूट रहे हैं. पहले अटकलें थीं कि पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ खुद राज्यसभा जा सकते हैं, लेकिन सूत्रों के हवाले से बड़ी खबर आ रही है कि कमलनाथ खुद चुनाव नहीं लड़ना चाहते, बल्कि वह अपने बेटे नकुलनाथ का 'सियासी पुनर्जन्म' चाहते हैं. इसी बीच छिंदवाड़ा के 5 कांग्रेस विधायकों की एक गुपचुप मुलाकात ने मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज कर दी है.

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नरेंद्र सिंह तोमर से बंद कमरे में पौन घंटे की मुलाकात

हाल ही में छिंदवाड़ा के पांच कांग्रेस विधायकों ने पेंच नेशनल पार्क (Pench National Park) में एक रिसॉर्ट पर मुलाकात की और परिवार के साथ समय बिताने के बहाने गंभीर राजनैतिक चर्चा की. इसके बाद जब मध्य प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर एक निजी कार्यक्रम में छिंदवाड़ा आए, तो ये पांचों कांग्रेस विधायक सर्किट हाउस पहुंचे और तोमर के साथ बंद कमरे में करीब पौन घंटे (45 मिनट) तक बैठक की.

इस सीक्रेट मीटिंग में सिर्फ विधानसभा अध्यक्ष ही नहीं, बल्कि उनके साथ छिंदवाड़ा जिले के भाजपा अध्यक्ष शेषराव यादव और कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व मंत्री दीपक सक्सेना भी मौजूद थे. पांच कांग्रेस विधायकों और तीन भाजपा नेताओं की इस बंद कमरे की बैठक को राजनीतिक पंडित महज एक 'शिष्टाचार भेंट' मानने से साफ इनकार कर रहे हैं.

कांग्रेस आलाकमान को सीधी चेतावनी?

भले ही विधायकों की तरफ से इस मुलाकात को अनौपचारिक बताते हुए क्षेत्र के विकास कार्यों का मुद्दा बताया गया, लेकिन सूत्रों का दावा है कि यह मुलाकात कांग्रेस आलाकमान के लिए एक सीधा और साफ संदेश है.

नकुलनाथ के लिए टिकट का दबाव: पिछले लोकसभा चुनाव में नकुलनाथ अपने ही गढ़ छिंदवाड़ा से चुनाव हार गए थे, जिससे उनके सियासी करियर पर बड़ा सवालिया निशान लग गया था. अब कमलनाथ अपने बेटे के करियर को दोबारा पटरी पर लाने के लिए उन्हें इस इकलौती सुरक्षित सीट से राज्यसभा भेजना चाहते हैं.

क्रॉस वोटिंग का खतरा: मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों में से दो पर भाजपा और एक पर कांग्रेस का कब्जा तय माना जा रहा है. लेकिन यदि कांग्रेस आलाकमान ने छिंदवाड़ा के इस दबाव के आगे घुटने नहीं टेके और नकुलनाथ को टिकट नहीं दिया, तो ये 5 विधायक क्रॉस वोटिंग (Cross Voting) कर सकते हैं या मतदान से नदारद रह सकते हैं. ऐसा होने पर कांग्रेस के हाथ से यह इकलौती सीट भी फिसल सकती है.

बैकफुट पर बीजेपी आलाकमान, पर मौके की तलाश

इस पूरे खेल में भाजपा की भूमिका भी काफी रोचक बनी हुई है. अंदरखाने तो भाजपा इस तीसरी सीट पर दांव खेलने की तैयारी कर रही थी. हालांकि, पिछले दिनों जब प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के बीच मुलाकात हुई, तो दिल्ली आलाकमान ने उन्हें सख्त नसीहत दी कि वे तीसरी सीट को लेकर कोई बयानबाजी न करें और सिर्फ अपनी दो सुरक्षित सीटों पर ही फोकस रखें.

इसके बावजूद, राजनीति में भाजपा का ट्रैक रिकॉर्ड रहा है कि वह विपक्षी खेमे की कमजोरी का फायदा उठाने से कभी नहीं चूकती. राजनैतिक विश्लेषक याद दिला रहे हैं कि कैसे पूर्ण बहुमत होने के बावजूद ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थकों की बगावत के कारण कमलनाथ की सरकार गिर गई थी. ऐसे में यदि कांग्रेस के भीतर बगावत की चिंगारी भड़कती है, तो भाजपा उसे हवा देने में देर नहीं करेगी.

अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस आलाकमान छिंदवाड़ा के इस भारी दबाव के आगे झुकते हुए नकुलनाथ को दिल्ली का टिकट थमाता है, या फिर मध्य प्रदेश की सियासत में कोई नया राजनीतिक भूचाल आने वाला है.


 

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