मध्य प्रदेश की सियासत में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर हलचल चरम पर पहुंच गई है. इसी बीच कांग्रेस आलाकमान ने पांच राज्यों की सात राज्यसभा सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. इस लिस्ट में मध्य प्रदेश से पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा गया है. मीनाक्षी को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता है. कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर मीनाक्षी नटराजन आगामी 8 जून को अपना नामांकन दाखिल करेंगी.
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दिग्विजय सिंह की जगह रेस में आगे निकलीं मीनाक्षी
दरअसल, मध्य प्रदेश से कांग्रेस के दिग्गज नेता और वर्तमान राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह का कार्यकाल आगामी 21 जून को खत्म हो रहा है. दिग्विजय सिंह ने पहले ही साफ कर दिया था कि वे तीसरी बार उच्च सदन (राज्यसभा) नहीं जाना चाहते. उनके इस फैसले के बाद प्रदेश कांग्रेस के कई दिग्गजों ने टिकट के लिए पैरवी शुरू कर दी थी. हालांकि, सियासी गलियारों में यह चर्चा पहले से तय थी कि यदि राहुल गांधी की पसंद को तरजीह दी गई, तो मीनाक्षी नटराजन का नाम सबसे आगे रहेगा और आखिरकार नेतृत्व ने उन्हीं के नाम पर मुहर लगा दी.
क्या कहता है सीटों का गणित?
मीनाक्षी नटराजन के नाम के ऐलान के साथ ही मध्य प्रदेश में राज्यसभा सीटों के समीकरणों पर गुणा-भाग शुरू हो गया है:
कांग्रेस की स्थिति: मध्य प्रदेश विधानसभा के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए कम से कम 58 विधायकों के मतों की जरूरत होती है. दतिया सीट खाली होने, विजयपुर विधायक के मतदान से बाहर रहने और विधायक निर्मला सप्रे के पाला बदलने के बाद भी कांग्रेस के पास कुल 62 विधायक मौजूद हैं. इस लिहाज से कांग्रेस की एक सीट पूरी तरह सुरक्षित मानी जा रही है.
बीजेपी की स्थिति और तीसरी सीट का सस्पेंस: दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पास वर्तमान में 164 विधायक हैं. गणित के हिसाब से दो राज्यसभा सीटें पक्की करने के लिए बीजेपी को 116 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होगी. दो सीटें जीतने के बाद बीजेपी के पास 48 अतिरिक्त विधायक बचते हैं. यदि पाला बदलने वाली विधायक निर्मला सप्रे और भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायक भी बीजेपी को वोट दे देते हैं, तब भी पार्टी तीसरी सीट के लिए जरूरी बहुमत के आंकड़े से करीब 8 वोट पीछे रह जाएगी. यही वजह है कि राज्य की तीसरी राज्यसभा सीट को लेकर सियासी सस्पेंस और अटकलें काफी बढ़ गई हैं.
कौन हैं मीनाक्षी नटराजन?
राहुल गांधी की कोर टीम का अहम हिस्सा मानी जाने वाली मीनाक्षी नटराजन का जन्म 23 जुलाई 1973 को मध्य प्रदेश के नागदा में हुआ था. शिक्षा की बात करें तो उन्होंने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से बायोकेमिस्ट्री में एमएससी (M.Sc.) और एलएलबी (LLB) की पढ़ाई की है.
मीनाक्षी ने अपने सियासी सफर की शुरुआत छात्र राजनीति (NSUI) से की थी. वे साल 1999 से 2002 तक NSUI की राष्ट्रीय अध्यक्ष रहीं और इसके बाद 2000 से 2005 तक उन्होंने मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस की कमान संभाली. संगठन में उनकी मजबूत पकड़ को देखते हुए साल 2008 में उन्हें एआईसीसी (AICC) सचिव बनाया गया.
साल 2009 के लोकसभा चुनाव में मीनाक्षी ने बीजेपी का मजबूत गढ़ माने जाने वाले मंदसौर संसदीय क्षेत्र से ऐतिहासिक जीत दर्ज कर राष्ट्रीय राजनीति में अपनी धमक दिखाई थी. वे संसद में महिला सशक्तिकरण कानून और जन शिकायत समिति की सदस्य होने के साथ-साथ कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) में भी अहम भूमिकाएं निभा चुकी हैं. वर्तमान में वे तेलंगाना कांग्रेस की एआईसीसी प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रही हैं. राजनीति के अलावा उन्हें लेखन का भी शौक है; उन्होंने '1857 भारतीय परिप्रेक्ष्य' और 'अपने-अपने कुरुक्षेत्र' जैसी प्रसिद्ध किताबें भी लिखी हैं.
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