मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पार्टी को बहुत बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. कांग्रेस उम्मीदवार और वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र खारिज होने के बाद, अब उन्हें देश की सबसे बड़ी अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिली है. सुप्रीम कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसके बाद मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला पूरी तरह खत्म हो गया है और बीजेपी उम्मीदवार की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ हो गया है.
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सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मीनाक्षी नटराजन की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अदालत चुनाव प्रक्रिया के बीच में दखल नहीं दे सकती. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि एक बार जब चुनावी प्रक्रिया शुरू हो जाती है, तो न्यायिक हस्तक्षेप की अपनी सीमाएं तय होती हैं और इस चरण में अदालत का हस्तक्षेप करना उचित नहीं है.
सुप्रीम कोर्ट ने रिटर्निंग ऑफिसर के उस फैसले का भी संज्ञान लिया, जिसमें बताया गया था कि याचिकाकर्ता (मीनाक्षी नटराजन) ने अधूरा फॉर्म भरा था और अपने खिलाफ चल रहे एक शिकायत मामले (आपराधिक मामले) की जानकारी छिपाई थी. अदालत ने यह भी नोट किया कि फॉर्म 26 और चुनाव संचालन नियम 1961 के नियम 4ए के तहत उम्मीदवार को अपने शपथ पत्र में सभी जानकारियां देना कानूनी रूप से अनिवार्य है.
चुनाव आयोग की चुप्पी पर उठाए सवाल, आगे की रणनीति पर क्या बोलीं मीनाक्षी?
सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद कोर्ट परिसर में मौजूद मीनाक्षी नटराजन ने मीडिया से बातचीत की. उन्होंने शीर्ष अदालत के फैसले पर सीधी टिप्पणी करने से इनकार करते हुए कहा:
"कोई आखिरी उम्मीद खत्म नहीं हुई है, आखिरी उम्मीद जनतंत्र में लोग और जनमानस होते हैं. मैं माननीय उच्चतम न्यायालय की गरिमा का सम्मान करती हूं, इसलिए आज उस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगी."
हालांकि, उन्होंने चुनाव आयोग के रवैये पर नाराजगी जताते हुए कहा, "मैं यह जरूर कहूंगी कि चुनाव आयोग की जो चुप्पी है, वो बहुत कुछ बताती है." दरअसल, कांग्रेस उम्मीदवार ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले के खिलाफ चुनाव आयोग का रुख किया था और 10 जून को व्यक्तिगत रूप से दलीलें भी पेश की थीं, लेकिन आयोग की तरफ से कोई आदेश पारित नहीं किया गया था.
जब उनसे पूछा गया कि क्या वह अब इस मामले को लेकर हाई कोर्ट का रुख करेंगी, तो उन्होंने साफ किया कि वह एक स्वतंत्र उम्मीदवार नहीं बल्कि पार्टी की प्रत्याशी हैं. आगे हाई कोर्ट जाना है या क्या रणनीति अपनानी है, इसका अंतिम फैसला कांग्रेस आलाकमान और पार्टी के वरिष्ठ नेता मिलकर तय करेंगे.
बीजेपी प्रत्याशी महेश केवट की जीत तय
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने और सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद अब मध्य प्रदेश की इस तीसरी राज्यसभा सीट पर मुकाबला समाप्त हो चुका है. इसके साथ ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार महेश केवट का निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुना जाना पूरी तरह तय हो गया है. बता दें कि बीजेपी ने ही कांग्रेस उम्मीदवार पर अपने एफिडेविट में आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई थी, जिसे जांच के बाद रिटर्निंग ऑफिसर ने सही पाया था.
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