मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आज हजारों की संख्या में शिक्षकों ने अपनी मांगों को लेकर मोर्चा खोल दिया है. भेल (BHEL) दशहरा मैदान में प्रदेश भर से जुटे शिक्षकों का गुस्सा अनिवार्य टीईटी (TET) परीक्षा और वरिष्ठता की गणना को लेकर है. शिक्षकों का कहना है कि 20-30 सालों की सेवा के बाद अब परीक्षा थोपना उनके आत्मसम्मान पर चोट है.
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क्या हैं शिक्षकों की प्रमुख मांगें?
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा के नेतृत्व में हो रहे इस प्रदर्शन में शिक्षकों ने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं:
TET परीक्षा निरस्त हो: सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए सरकार द्वारा लागू की गई टीईटी परीक्षा को शिक्षक 'अपमानजनक' मान रहे हैं. उनका तर्क है कि जब वे भर्ती हुए थे, तब उन्होंने योग्यता परीक्षा पास की थी. अब रिटायरमेंट के करीब पहुँचकर फिर से परीक्षा देना उनके लिए मानसिक प्रताड़ना है.
प्रथम नियुक्ति दिनांक से वरिष्ठता: शिक्षकों की मांग है कि उनकी सेवा की गणना नियुक्ति की तारीख से की जाए. उनका आरोप है कि 2018 में पुनः नियुक्ति देकर उनकी पिछली 20-25 सालों की वरिष्ठता को शून्य कर दिया गया है.
'कलेक्टर और अन्य कर्मचारियों की परीक्षा क्यों नहीं?'
प्रदर्शनकारी शिक्षकों ने सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि सिर्फ शिक्षकों की ही योग्यता की बार-बार जांच क्यों की जा रही है? एक शिक्षक ने गुस्से में कहा, "अगर शिक्षकों को परीक्षा देनी पड़ रही है, तो कलेक्टर और अन्य विभागों के कर्मचारियों की भी परीक्षा हर 20-30 साल में ली जानी चाहिए. हमने उन अंचलों में शिक्षा की अलख जगाई जहाँ कोई जाना नहीं चाहता था."
लाडली बहनों का भी समर्थन, OPS की मांग
प्रदर्शन में महिला शिक्षकों (लाडली बहना) ने भी बड़ी संख्या में हिस्सा लिया. परीक्षा निरस्त करने के साथ-साथ शिक्षकों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने की भी मांग दोहराई. महिला शिक्षकों का कहना है कि वे परिवार का भरण-पोषण और स्कूल की जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं, उनके परीक्षा परिणामों का रिकॉर्ड (Results) शानदार है, ऐसे में इस परीक्षा का कोई औचित्य नहीं है.
सरकार की क्या है तैयारी?
शिक्षकों के विरोध को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक रिव्यू पिटीशन (Review Petition) दायर की है. हालांकि, शिक्षक इस आश्वासन से संतुष्ट नहीं हैं. उनका कहना है कि सरकार को विधानसभा में विधेयक लाना चाहिए और इसे कानूनी रूप से रद्द करना चाहिए.
'दिल्ली कूच' की चेतावनी
शिक्षकों ने स्पष्ट कर दिया है कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो वे अपने आंदोलन को और उग्र करेंगे और भोपाल से दिल्ली तक मार्च करने की योजना बनाएंगे.
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