देश के इतिहास में पहली बार किसी राज्य के वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम यानी हिंदू सदस्यों को शामिल किया गया है. मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार ने वक्फ बोर्ड का पुनर्गठन करते हुए यह ऐतिहासिक और बड़ा कदम उठाया है. 'वक्फ संशोधन अधिनियम 2025' के लागू होने के बाद मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है, जिसने इस नए कानून के तहत बोर्ड का गठन किया है. सरकार के इस फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक बयानों और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है.
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क्या है पूरा मामला?
मध्य प्रदेश सरकार ने 4 जुलाई 2026 को एक राजपत्र अधिसूचना जारी की. इस अधिसूचना के जरिए वक्फ अधिनियम की धारा 13/1 के तहत नए बोर्ड के गठन का ऐलान किया गया है. इस नए बोर्ड में कुल 10 सदस्य शामिल हैं, जिनमें पहली बार दो हिंदू चेहरों को जगह दी गई है. इसके साथ ही सनवर पटेल को एक बार फिर से वक्फ बोर्ड का अध्यक्ष (चेयरमैन) नियुक्त किया गया है.
कौन हैं बोर्ड में शामिल हुए 2 हिंदू सदस्य?
वक्फ बोर्ड में शामिल किए गए दो गैर-मुस्लिम चेहरे हैं:
- मनोज मालपानी (इंदौर निवासी)
- अनिमेश भार्गव (गुना के राघोगढ़ निवासी)
पुराने और नए कानून में क्या बदला?
साल 1995 के पुराने वक्फ कानून के मुताबिक, वक्फ बोर्ड में सिर्फ मुस्लिम समुदाय के लोग ही सदस्य बन सकते थे. अगर सरकार किसी को नामित भी करती थी, तो उसका मुस्लिम होना अनिवार्य था.
हालांकि, साल 2025 में हुए ऐतिहासिक संशोधन के बाद अब हर राज्य के वक्फ बोर्ड में कम से कम दो गैर-मुस्लिम (हिंदू या अन्य) सदस्यों का होना अनिवार्य कर दिया गया है. इसी नए नियम को जमीन पर उतारने वाला मध्य प्रदेश देश का पहला राज्य बन गया है.
फैसले पर शुरू हुई सियासत
वक्फ बोर्ड के नवनियुक्त चेयरमैन सनवर पटेल ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. उन्होंने कहा, "मैं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का धन्यवाद करता हूं जिन्होंने 'सबका साथ सबका विकास' के तहत मुस्लिम समाज और वक्फ बोर्डों की चिंता की. वक्फ माफिया बरसों से इन संपत्तियों पर जमे थे. नए कानून में दो बहनों (महिलाओं) और एक्सपर्ट के नाते दो नॉन-मुस्लिम्स का होना जरूरी किया गया है ताकि सही प्रबंधन हो सके. इसके लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव का भी अभिनंदन."
बीजेपी विधायक रामेश्वर शर्मा ने भी सरकार के इस फैसले की सराहना की. उन्होंने विपक्ष और सवाल उठाने वालों पर निशाना साधते हुए कहा, "वक्फ कमेटी की जमीन आखिर हिंदुस्तान की ही है. जब हम गंगा-जमुनी तहजीब की बात करते हैं, तो गरीबों के हित में दी जाने वाली भूमि किसी मुल्ला-मौलवी के नाम तो नहीं की गई. हिंदू सदस्यों का दृष्टिकोण भी गरीबों का भला करने का है. इससे मुसलमानों को तकलीफ नहीं होनी चाहिए, हां, तकलीफ उन्हें जरूर होगी जो वक्फ की प्रॉपर्टी खा रहे थे."
क्या होती है वक्फ संपत्ति?
वक्फ उस संपत्ति (Zamin या Property) को कहा जाता है जिसे कोई मुस्लिम व्यक्ति या संस्था धार्मिक, शैक्षणिक या सामाजिक भलाई के काम के लिए दान करता है. इसमें मुख्य रूप से मस्जिद, दरगाह, मदरसे और खाली जमीनें शामिल होती हैं. सरकार का दावा है कि इस नए बदलाव के बाद वक्फ संपत्तियों के मैनेजमेंट में पारदर्शिता (Transparency) आएगी और सुशासन को मजबूती मिलेगी. अब देखना यह होगा कि मध्य प्रदेश के इस कदम के बाद देश के अन्य राज्य इस नए कानून को कब तक लागू करते हैं.
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