मध्य प्रदेश में नौतपा के बीच मौसम का एक अनोखा मिजाज देखने को मिल रहा है. जहां एक तरफ प्रदेश के कुछ हिस्सों में सूरज की तपिश और गर्म रातों का सिलसिला जारी है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिमी विक्षोभ और चक्रवातीय गतिविधियों के चलते राज्य के बड़े हिस्से में तेज आंधी, ओलावृष्टि और बारिश ने मौसम को पूरी तरह बदल दिया है. मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में अगले तीन दिनों के दौरान अधिकतम तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की और गिरावट दर्ज की जा सकती है, जिससे झुलसाने वाली गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है.
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कैसा रहेगा 31 मई को आपके शहर का मिजाज
मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, 31 मई की सुबह तक राज्य के अलग-अलग हिस्सों में मौसम के कई रंग देखने को मिलेंगे. मंदसौर और नीमच जिलों में अनेक स्थानों पर गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना जताई गई है. इसके अलावा रतलाम, उज्जैन और आगर मालवा जिलों में कुछ स्थानों पर बारिश हो सकती है. वहीं राजधानी भोपाल, विदिशा, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, नर्मदापुरम, अलीराजपुर, झाबुआ, धार, इंदौर, देवास, शाजापुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, ग्वालियर, दतिया, भिंड, मुरैना, श्योपुरकलां, सिंगरौली, सीधी, रीवा, मऊगंज, सतना, अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, डिंडोरी, कटनी, जबलपुर, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, मंडला, बालाघाट, पन्ना, दमोह, सागर, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर और पांढुर्णा जिलों में कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ हल्की वर्षा या बूंदाबांदी हो सकती है. हालांकि, बैतूल, हरदा, बुरहानपुर, खंडवा, खरगोन और बड़वानी जिलों में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है.
तापमान का लेखा-जोखा: कहां कितनी रही तपिश और कहां मिली राहत
पिछले 24 घंटों के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश में सबसे ज्यादा अधिकतम तापमान नरसिंहपुर जिले में 43.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. इसके बाद रायसेन में 43.0 डिग्री सेल्सियस, विदिशा और नर्मदापुरम में 42.5 डिग्री सेल्सियस, राजगढ़ में 42.4 डिग्री सेल्सियस और खंडवा में 42.1 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिससे यहां दोपहर के समय खासी गर्मी महसूस की गई.
दूसरी तरफ, आंधी और बारिश के प्रभाव से कुछ जिलों में तापमान सामान्य से काफी नीचे आ गया है. प्रदेश में सबसे कम अधिकतम तापमान ग्वालियर में 34.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इसके अलावा अमरकंटक (अनूपपुर) में 35.0 डिग्री सेल्सियस, चित्रकूट (सतना) में 35.4 डिग्री सेल्सियस, दतिया में 35.6 डिग्री सेल्सियस और मरुखेड़ा (नीमच) में 36.6 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा. रात के पारे की बात करें तो सबसे कम न्यूनतम तापमान दमोह में 18.6 डिग्री सेल्सियस, पचमढ़ी (नर्मदापुरम) में 20.2 डिग्री सेल्सियस, शिवपुरी में 20.3 डिग्री सेल्सियस, नौगांव (छतरपुर) में 20.5 डिग्री सेल्सियस और दतिया में 20.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया. इसके विपरीत छिंदवाड़ा में न्यूनतम तापमान 29.4 डिग्री, बड़वानी के तालुन में 28.9 डिग्री, देवास के कन्नौद में 28.1 डिग्री, सीहोर के भैरूंदा में 27.5 डिग्री और नर्मदापुरम में 27.0 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे इन इलाकों में रातें काफी गर्म रहीं. सिवनी में तो तीव्र गर्म रात (Severe Warm Night) का असर देखा गया.
तूफानी हवाओं और ओलावृष्टि का अलर्ट
मौसम विभाग ने 31 मई के लिए चेतावनी जारी करते हुए बताया है कि मंदसौर और नीमच जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा, वज्रपात और 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से झोंकेदार हवाओं के साथ ओलावृष्टि हो सकती है. इसी तरह ग्वालियर, दतिया, भिंड, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में भी ओलावृष्टि और 50-60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी चलने की आशंका है. राजधानी भोपाल, इंदौर, उज्जैन सहित प्रदेश के अन्य बचे हुए अधिकांश जिलों में भी वज्रपात और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी चलने की चेतावनी दी गई है. पिछले 24 घंटों में भी अशोकनगर में 70 किमी/घंटा, ग्वालियर और शिवपुरी में 67 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं, जबकि शिवपुरी, मुरैना, सागर और श्योपुर जिलों में ओले भी गिरे.
मौसम प्रणालियों का असर और मानसून की दस्तक
इस मौसमी उथल-पुथल के पीछे कई बड़ी वजहें हैं. दक्षिण-पश्चिम मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है और यह अरब सागर, लक्षद्वीप, केरल और बंगाल की खाड़ी के कुछ और हिस्सों की तरफ अग्रसर है, जिससे आने वाले 4-5 दिनों में परिस्थितियां और अनुकूल हो जाएंगी. इसके साथ ही, उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश के ऊपर समुद्र तल से 3.1 से 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक चक्रवाती परिसंचरण (Cyclonic Circulation) के रूप में पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है. एक अन्य द्रोणिका (ट्रफ लाइन) मध्य पाकिस्तान के चक्रवाती परिसंचरण से लेकर राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण ओडिशा होते हुए आंध्र प्रदेश के तट तक जा रही है, जिसके चलते अरब सागर से आ रही नमी के कारण मध्य प्रदेश का मौसम पूरी तरह से बदल गया है.
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