"मध्य प्रदेश अजब है, सबसे गजब है!" यह कहावत एक बार फिर साबित हुई है, लेकिन इस बार मामला स्वास्थ्य विभाग की साख और व्यवस्था से जुड़ा है. मध्य प्रदेश नर्सिंग रजिस्ट्रेशन काउंसिल (MPNRC) के ऑनलाइन सिस्टम का एक ऐसा चौंकाने वाला कारनामा सामने आया है, जिसने पूरे प्रशासनिक तंत्र की पोल खोलकर रख दी है. पोर्टल पर गधे की फोटो, नाम 'डंकी' और जाति 'एनिमल' भरकर आवेदन किया गया और महज 2,050 रुपये की फीस जमा होते ही बिना किसी वेरिफिकेशन के फर्जी नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी हो गया.
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कैसे हुआ इस सच का खुलासा?
NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष रवि परमार ने काउंसिल के ऑनलाइन पोर्टल की सुरक्षा और दस्तावेज जांच प्रक्रिया की हकीकत परखने के लिए एक 'टेस्ट आवेदन' किया था. उनका मकसद यह जानना था कि पोर्टल पर आवेदकों के डाक्यूमेंट्स का वेरिफिकेशन किस स्तर पर होता है.
इसके लिए उन्होंने ऑनलाइन फॉर्म में
फोटो: गधे की तस्वीर अपलोड की.
नाम: डंकी (Donkey).
पिता व मां का नाम: डंकी फादर व डंकी मदर.
जाति: एनिमल (Animal).
कॉलेज का नाम: भोपाल नर्सिंग कॉलेज और BMHRC.
अंक व रोल नंबर: मनमाने ढंग से भरे.
हैरानी की बात यह रही कि जैसे ही 2,050 रुपये की रजिस्ट्रेशन फीस का भुगतान हुआ, पोर्टल ने बिना किसी जांच-पड़ताल या जमीनी वेरिफिकेशन के तुरंत आधिकारिक नर्सिंग रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जारी कर दिया.
स्वास्थ्य व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल
इस मामले के सामने आने के बाद NSUI ने दस्तावेज जांच की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं. रवि परमार ने कहा कि यदि इतने बेतुके विवरण और फर्जी फोटो पर सर्टिफिकेट जारी हो सकता है, तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं है. यह सीधे तौर पर फर्जीवाड़ा करने वालों के लिए खुला रास्ता है और प्रदेश के मरीजों की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है.
NSUI ने मांग की है कि MPNRC के पूरे डिजिटल पोर्टल का तत्काल और निष्पक्ष ऑडिट कराया जाए, ताकि यह पता चल सके कि इस लचर व्यवस्था के चलते अब तक कितने अयोग्य या फर्जी लोगों को प्रमाणपत्र बांटे जा चुके हैं.
महकमे में हड़कंप, सफाई का इंतजार
मध्य प्रदेश में नर्सिंग पंजीयन प्रक्रिया के तहत अभ्यर्थी अपने ट्रेनिंग कंप्लीशन और डिग्री/डिप्लोमा पोर्टल पर अपलोड कर सीधे रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन करते हैं. बिना किसी जांच के गधे के नाम पर सर्टिफिकेट जारी होने से स्वास्थ्य विभाग की भारी फजीहत हो रही है. फिलहाल इस गंभीर मामले में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है, लेकिन अब देखना होगा कि शासन जिम्मेदार अधिकारियों पर क्या कार्रवाई करता है.
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