मध्य प्रदेश के दतिया उपचुनाव के नतीजों ने प्रदेश भाजपा और पार्टी संगठन की नींद उड़ा दी है. आमतौर पर राज्य में सत्तारूढ़ पार्टी को उपचुनावों में बढ़त का फायदा मिलता है, लेकिन दतिया में भाजपा को कांग्रेस के हाथों 6,000 से अधिक वोटों से करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है. इस अप्रत्याशित हार के बाद से ही भाजपा के अंदरूनी गलियारों में भारी सियासी घमासान मचा हुआ है.
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इसी बीच, पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा भोपाल में दो दिनों की खामोशी और रणनीति बनाने के बाद अचानक दिल्ली पहुंच गए हैं, जिससे इस बात की कयासबाजी तेज हो गई है कि क्या पार्टी हाईकमान भीतरघात को लेकर कोई बड़ा फैसला लेने वाला है.
टिकट कटने से लेकर समर्थकों का हंगामा और हार तक
दतिया उपचुनाव की पूरी पटकथा नरोत्तम मिश्रा के इर्द-गिर्द ही घूमती नजर आई है. नरोत्तम मिश्रा इस सीट से चुनाव की तैयारी कर रहे थे और उन्होंने नामांकन पत्र भी ले लिया था. हालांकि, आखिरी समय में उनका टिकट काटकर आशुतोष तिवारी को भाजपा का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया.
टिकट कटते ही उनके समर्थकों में भारी असंतोष फैल गया और समर्थकों ने चक्काजाम और उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया. जिले के कार्यकारिणी के कई नेताओं ने इस्तीफे तक दे दिए थे. स्थिति को संभालने के लिए पार्टी आलाकमान ने मान-मनौव्वल का दौर शुरू किया. इसके बाद नरोत्तम मिश्रा ने भारी मन से चुनाव प्रचार किया और जनता से वोट मांगे, लेकिन अंततः परिणाम पार्टी के खिलाफ ही गए.
जिला कार्यकारिणी भंग, दिल्ली में शीर्ष नेताओं की बैठकें
दतिया में मिली हार के बाद भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने अनुशासनहीनता और अनुशासन तोड़ने वालों पर सख्त रवैया अपनाया है. पार्टी ने पूरी दतिया जिला कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया है और जिलाध्यक्ष समेत संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों को पद से हटा दिया है.
दूसरी ओर, दिल्ली में हलचल काफी तेज हो गई है:
- शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की है.
- कैलाश विजयवर्गीय ने गृहमंत्री अमित शाह से मुलाकात कर फीडबैक दिया है.
- नरोत्तम मिश्रा भी दिल्ली पहुंचे हैं और शीर्ष नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं.
- दिल्ली जाने से ठीक पहले नरोत्तम मिश्रा ने दतिया प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के घर जाकर मुलाकात की और एकजुटता दिखाने का संदेश दिया.
क्या गिरेगा 'बड़ा विकेट'?
वरिष्ठ पत्रकार चैतन्य भट्ट के अनुसार, सत्तारूढ़ दल होने के बावजूद 6,000 से अधिक वोटों से मिली यह हार भाजपा संगठन के लिए एक बड़ा झटका है. नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों के उग्र रुख और चक्काजाम पर पार्टी हाईकमान की कड़ी नजर थी. चुनाव के वक्त स्थिति संभालने के लिए मामले को भले ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया था, लेकिन अब चुनाव समाप्त होने के बाद अनुशासनहीनता पर सख्त कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
जिस तरह पूरी जिला इकाई पर गाज गिरी है, उससे यह साफ संकेत मिलता है कि आलाकमान भीतरघात के आरोपों को लेकर गंभीर है. अब देखना यह होगा कि दिल्ली में चल रही बैठकों के बाद क्या नरोत्तम मिश्रा के खिलाफ कोई सख्त कदम उठाया जाएगा या फिर समझा-बुझाकर इस विवाद को यहीं शांत कर दिया जाएगा.
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