रात के अंधेरे में खुली MP विस सचिवालय, नरोत्तम मिश्रा को हराने वाले कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती के खिलाफ लिया एक्शन, तभी पहुंचे जीतू पटवारी...मचा बवाल

मध्य प्रदेश में दतिया विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता को लेकर आधी रात को मचा बवाल। जीतू पटवारी ने विधानसभा सचिवालय खुलने पर उठाए सवाल। जानें क्या है पूरा मामला.

कांग्रेस विधायक राजेंद्र भाटी
कांग्रेस विधायक राजेंद्र भाटी

प्राची अवस्थी

follow google news

मध्य प्रदेश की राजनीति में गुरुवार की रात एक बड़े हाई-प्रोल्टेज ड्रामे की गवाह बनी. दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को दिल्ली की अदालत से सजा सुनाए जाने के चंद घंटों बाद ही उनकी विधानसभा सदस्यता को लेकर सचिवालय में हलचल तेज हो गई. रात करीब 10:30 बजे अचानक विधानसभा सचिवालय खोला गया, जिसके बाद कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है. 

Read more!

रात 10:30 बजे अचानक खुला सचिवालय

हैरानी की बात यह रही कि आम दिनों में शाम को बंद होने वाला विधानसभा सचिवालय गुरुवार रात को अचानक खोल दिया गया. प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा खुद दफ्तर पहुंचे, जिसके बाद दतिया विधानसभा सीट को रिक्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू होने की खबरें आने लगीं. जैसे ही इसकी भनक कांग्रेस को लगी, प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा दलबल के साथ विधानसभा जा पहुंचे.

जीतू पटवारी के सवालों से बचते दिखे अधिकारी

विधानसभा पहुंचे जीतू पटवारी ने प्रमुख सचिव अरविंद शर्मा से तीखे सवाल किए. उन्होंने पूछा- आखिर इतनी रात को सचिवालय खोलने की क्या जरूरत आन पड़ी? पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के इशारे पर नियमों को ताक पर रखकर यह कार्रवाई की जा रही है. हालांकि, प्रमुख सचिव बिना कोई स्पष्ट जवाब दिए अपनी गाड़ी में बैठकर वहां से रवाना हो गए. 

क्या है पूरा मामला?

राजेंद्र भारती पर यह आरोप उस समय के हैं जब वे कोऑपरेटिव बैंक में अध्यक्ष के तौर पर कार्यरत थे. उनपर आरोप है कि उन्होंने अपनी मां के नाम से करीब 12 लाख रुपये की एफडी (FD) कराई थी, जिसकी अवधि पहले 3 साल थी. अधिक ब्याज का लाभ लेने के लिए उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर इस अवधि को बढ़ाकर 15 साल कर दिया था. इस अनियमितता की शिकायत बैंक के ही एक कर्मचारी ने की थी, जिसके बाद मामला अदालत पहुंचा. 

कोर्ट का कड़ा फैसला

बुधवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भारती को आईपीसी की धारा 120, 420, 467, 468 और 471 (आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी) के तहत दोषी माना था. गुरुवार को कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते हुए विधायक और उनके सहयोगी रघुवीर शरण प्रजापति को 3 साल की सजा और 1 लाख रुपये के जुर्माने का दंड दिया. 

आगे क्या होगा?

फिलहाल कोर्ट ने राजेंद्र भारती को 20,000 रुपये के निजी मुचलके (Bond) पर जमानत दे दी है. अदालत ने उन्हें ऊपरी अदालत में अपील दायर करने के लिए 30 दिन का समय दिया है. कांग्रेस का तर्क है कि जब सजा निलंबित है और अपील का समय दिया गया है, तो इतनी जल्दबाजी में सदस्यता खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करना पूरी तरह असंवैधानिक और राजनीतिक विद्वेष से प्रेरित है. 

राजनीतिक गरमाहट

गौरतलब है कि राजेंद्र भारती ने ही इस केस को ग्वालियर कोर्ट से दिल्ली ट्रांसफर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि नरोत्तम मिश्रा और उनके परिवार के राजनीतिक दबाव के कारण निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है. अब सजा के ऐलान के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में हड़कंप मच गया है, वहीं विपक्षी खेमे में हलचल तेज है. 

बीजेपी पर हमलावर कांग्रेस

जीतू पटवारी ने कहा, "इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी विधायक की सदस्यता छीनने के लिए रात के 11 बजे विधानसभा खोली गई. यह पूरी तरह से अनैतिक काम है और हम इसे अदालत में चुनौती देंगे." फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है और अब सबकी नजरें विधानसभा के आधिकारिक नोटिफिकेशन पर टिकी हैं. 

ये भी पढ़ें: मध्य प्रदेश के दतिया में जमानत पर छूट कर आए बीजेपी नेता को बीच सड़क पर दौड़ाकर क्यों मारी गई गोली ?

    follow google news