मध्य प्रदेश के नीमच जिले में एक कांस्टेबल की आत्महत्या ने पूरे पुलिस विभाग और शासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. आरक्षक होशियार सिंह अहीर ने मौत को गले लगाने से पहले डीजीपी के नाम एक पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने पुलिस विभाग के अंदर व्याप्त भ्रष्टाचार और अधिकारियों की प्रताड़ना का ऐसा खुलासा किया है जिससे हड़कंप मच गया है. आइए जानते है पूरा मामला.
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'पैसों में सब बिक रहा है...'
नीमच पुलिस लाइन कनावटी में तैनात होशियार सिंह ने जहरीले पदार्थ का सेवन कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली. अस्पताल में इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया, लेकिन मरने से पहले उन्होंने अपने पत्र में लिखा: 'डीजीपी साहब, पुलिस को इतना भी मत बेचो कि सही आदमी नौकरी न कर पाए. नीमच में सब कुछ पैसों में बिक रहा है और कोई सुनने को तैयार नहीं है.'
अधिकारियों पर लगाए बेहद गंभीर आरोप
होशियार सिंह ने अपने सुसाइड नोट में आरआई (RI) नीमच और एक हेड कांस्टेबल प्रणव तिवारी पर सीधे आरोप लगाए हैं. उनके पत्र के अनुसार:
- थानों में ड्यूटी, पीसीआर ड्यूटी, और यहां तक कि जिम-खेल जैसी सुविधाएं भी पैसों के बदले दी जा रही हैं.
- कर्मचारियों से पैसा लेकर पसंदीदा ड्यूटी लगाई जाती है.
- शिकायत करने पर अधिकारी कहते हैं कि यह पैसा ऊपर (एसपी साहब के निजी खर्चों तक) जाता है.
- आरक्षक ने यहां तक लिखा कि अगर ईमानदारी की जगह नहीं है, तो उन्हें 'गलत कदम उठाने की स्वीकृति' दे दी जाए.
बेटी का दर्द: 'पापा पर ड्यूटी का दबाव था'
मृतक आरक्षक की बेटी ने आरोप लगाया कि उसके पिता के चार ऑपरेशन हो चुके थे, फिर भी अधिकारी उन्हें राहत देने के बजाय परेशान करते थे. बेटी का दावा है कि उसके पिता कमजोर नहीं थे, बल्कि उन्हें सिस्टम ने इस कदर मजबूर कर दिया. उन्होंने कंट्रोल रूम के सीसीटीवी फुटेज चेक करने की भी मांग की है.
पुलिस विभाग की सफाई
इस पूरे मामले पर नीमच एसपी का कहना है कि लगाए गए आरोपों की अभी पुष्टि नहीं हुई है. एसपी ने कहा, 'यह एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना है. आरक्षक द्वारा आरआई और हेड कांस्टेबल पर लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जो भी वैधानिक कार्रवाई होगी, वह की जाएगी.'
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