नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) की दोबारा परीक्षा (Re-Exam) के दौरान मध्य प्रदेश के विदिशा से एक ऐसी भावुक कर देने वाली तस्वीर सामने आई, जिसने सोशल मीडिया पर हर किसी को झकझोर कर रख दिया. भारी बारिश और विपरीत परिस्थितियों के चलते सिर्फ 2 मिनट की देरी की वजह से एक छात्रा को परीक्षा देने से रोक दिया गया. अब इस मामले में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने पीड़ित छात्रा से फोन पर बात कर उसका हौसला बढ़ाया है.
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70 किमी का सफर
यह पूरा मामला विदिशा के कुल्हा गांव की रहने वाली छात्रा रागिनी विश्वकर्मा से जुड़ा है. रागिनी अपने पिता के साथ करीब 70 किलोमीटर का लंबा सफर तय करके नीट री-एग्जाम देने परीक्षा केंद्र पहुंची थी. लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया। रास्ते में तेज बारिश शुरू हो गई और बीच राह में उनकी बाइक भी पंचर हो गई. तमाम मुश्किलों का सामना करते हुए जब पिता-पुत्री केंद्र पर पहुंचे, तो वे महज 2 मिनट लेट हो चुके थे.
बायोमेट्रिक लॉक होने से बाहर निकाला
बताया जा रहा है कि शुरुआत में रागिनी को गेट के अंदर तो ले लिया गया था, लेकिन तय समय बीत जाने की वजह से डिजिटल सिस्टम में उसकी बायोमेट्रिक अटेंडेंस (Biometric Attendance) लॉक हो चुकी थी. बायोमेट्रिक न होने के कारण उसे परीक्षा केंद्र से बाहर कर दिया गया. सालभर की मेहनत पर पानी फिरता देख रागिनी परीक्षा केंद्र के बाहर ही पिता के गले लगकर फूट-फूटकर रोने लगी. बेटी का यह दर्द देख मकान बनाने का काम करने वाले बेबस पिता भी खुद को रोक नहीं पाए और बदहवास होकर जमीन पर गिरकर रोने लगे.
जीतू पटवारी ने लगाया फोन
इस भावुक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने रागिनी विश्वकर्मा और उनके पिता से फोन पर बात की. पटवारी ने रागिनी को ढांढस बंधाते हुए कहा, "एक एग्जाम आपके सपनों से बड़ा नहीं हो सकता, नर्वस मत होना, हम पूरी तरह आपके साथ हैं. आप आगे की पढ़ाई जारी रखिए।" जीतू पटवारी ने पीड़ित परिवार को आर्थिक और हर संभव मदद का भरोसा दिया और रागिनी को भोपाल स्थित अपने आवास पर मिलने के लिए भी आमंत्रित किया. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कड़े नियमों और इस निष्ठुर सिस्टम पर भी सवाल उठाए.
परीक्षा अधिकारियों की दलील
इस पूरे घटनाक्रम पर जब परीक्षा अधिकारियों से पक्ष मांगा गया, तो उनका कहना था कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के बेहद सख्त नियम और गाइडलाइंस हैं. तय समय सीमा समाप्त होने के बाद सुरक्षा और निष्पक्षता के लिहाज से डिजिटल गेट और बायोमेट्रिक सिस्टम ऑटोमैटिक लॉक हो जाते हैं, जिसमें परीक्षा केंद्र के स्तर पर चाहकर भी कोई बदलाव नहीं किया जा सकता.
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