NEET Result 2026: 22 लाख बच्चों को पछाड़ जबलपुर के आर्यमन सोलंकी बने MP टॉपर, बताया री-नीट के तनाव से निपटने का सीक्रेट मंत्र!

धीरज शाह

17 Jul 2026 (अपडेटेड: Jul 17 2026 3:37 PM)

NEET Result 2026: जबलपुर के आर्यमन सोलंकी ने हार न मानते हुए NEET 2026 की परीक्षा में 720 में से 692 अंक हासिल कर मध्य प्रदेश में पहला स्थान (AIR 46) प्राप्त किया है.

NEET RESULT 2026
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NEET 2026 के नतीजों में मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले आर्यमन सोलंकी ने इतिहास रच दिया है. आर्यमन ने नीट परीक्षा में शानदार प्रदर्शन करते हुए पूरे मध्य प्रदेश में पहला स्थान (MP Topper) हासिल किया है. उन्होंने 720 में से 692 अंक प्राप्त किए हैं. ऑल इंडिया रैंक (AIR) 46 और जनरल कैटेगरी में उनकी 39वीं रैंक आई है. इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही आर्यमन का दिल्ली एम्स (AIIMS Delhi) से पढ़ाई करने का सबसे बड़ा सपना भी पूरा हो गया है.

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12वीं के साथ की तैयारी, हर रोज दिए 6 घंटे

आर्यमन सोलंकी ने अपनी सफलता का सफर कक्षा 11वीं से ही शुरू कर दिया था. उन्होंने 12वीं बोर्ड की परीक्षा के साथ-साथ नीट की तैयारी को बैलेंस किया. आर्यमन ने बताया कि वे हर रोज नियम से करीब 6 घंटे पढ़ाई करते थे. उनका मानना है कि अगर सही प्लानिंग, अनुशासन (Discipline) और निरंतरता (Consistency) रखी जाए, तो बोर्ड और नीट दोनों परीक्षाओं की तैयारी एक साथ बहुत बेहतर तरीके से की जा सकती है.

री-नीट (Re-NEET) की खबर से लगा था झटका

जब मई के महीने में पहली बार नीट परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा (Re-NEET) कराने की खबर आई, तो आर्यमन काफी निराश हो गए थे. उन्हें लगा कि उनकी पुरानी मेहनत बेकार चली जाएगी. आर्यमन ने कहा, "जब री-नीट का अनाउंसमेंट हुआ तो मैं दुखी था कि वापस पढ़ने कैसे बैठूंगा. लेकिन मैंने अपने दोस्तों और बाकी 22 लाख बच्चों के बारे में सोचा कि परिस्थिति सबके लिए एक जैसी है. मैंने खुद को संभाला, दोबारा पूरी मेहनत से तैयारी शुरू की और नतीजा सबके सामने है. री-नीट में निष्पक्ष (Fair) पेपर हुआ और सही मेहनत करने वाले बच्चों को अच्छी रैंक मिली."

डॉक्टर माता-पिता का मिला पूरा सपोर्ट

आर्यमन का परिवार चिकित्सा क्षेत्र से ही जुड़ा हुआ है. उनके पिता डॉ. फनेंद्र सिंह सोलंकी जबलपुर के नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज में यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर हैं. पिता ने बताया कि बेटे ने पूरी तैयारी अपने दम पर की है, परिवार ने कभी पढ़ाई में कोई दखल नहीं दिया, बस मुश्किल समय में उसका मनोबल बढ़ाया. वहीं उनकी मां डॉ. अनुपमा सोलंकी ने बताया कि आर्यमन बचपन से ही बहुत फोकस्ड और इंडिपेंडेंट रहा है. खास बात यह रही कि आर्यमन ने पढ़ाई के दौरान मोबाइल से पूरी तरह दूरी नहीं बनाई थी, बल्कि सोशल मीडिया और पढ़ाई के बीच एक सही संतुलन बनाकर रखा था.

अब अगला लक्ष्य: पिता की तरह बनना है यूरोलॉजिस्ट

आर्यमन का अगला पड़ाव अब देश के सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान एम्स दिल्ली से एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई करना है. इसके बाद वे अपने पिता की राह पर चलते हुए यूरोलॉजी (Urology) में ही स्पेशलाइजेशन (विशेषज्ञता) हासिल करना चाहते हैं. आर्यमन की यह कामयाबी उन लाखों छात्रों के लिए एक बड़ी प्रेरणा है जो मुश्किल हालातों में भी हौसला नहीं खोते.