दिल्ली में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा को पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने की लपटें अब मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल तक पहुंच गई हैं. घटना के विरोध में मध्य प्रदेश कांग्रेस देर रात सड़कों पर उतर आई और भोपाल स्थित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय का देर रात तक घेराव किया.
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अरेरा हिल्स स्थित CEO दफ्तर के बाहर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की अगुआई में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने धरना दिया. प्रदर्शनकारियों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और उनके तत्काल इस्तीफे की मांग की.
जीतू पटवारी का गंभीर आरोप: 'वोट चोरी के दम पर बनीं भाजपा सरकारें'
धरने को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर करारा हमला बोला.
जीतू पटवारी ने कहा कि
"देश के अलग-अलग राज्यों में भाजपा की सरकारें 'वोट चोरी' के जरिए बनी हैं और अब यह कथित गड़बड़ी पूरी तरह बेनकाब हो चुकी है. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और विपक्ष के तमाम सांसद संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए सवाल पूछने निर्वाचन आयोग जा रहे थे, लेकिन उन्हें असंवैधानिक तरीके से हिरासत में ले लिया गया. यह लोकतांत्रिक और संवैधानिक संस्थाओं को योजनाबद्ध तरीके से कमजोर करने की साजिश है."
उमंग सिंघार का भी तीखा हमला
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पुलिसिया कार्रवाई की कड़े शब्दों में निंदा करते हुए कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है. निष्पक्ष चुनाव प्रणाली लोकतंत्र की आत्मा है और अगर चुनाव आयोग में सवाल पूछने पर नेताओं को जेल या हिरासत में भेजा जाएगा, तो कांग्रेस चुप नहीं बैठेगी.
दिल्ली से भोपाल तक क्यों भड़की यह सियासी आग?
इस पूरे सियासी भूचाल की शुरुआत दिल्ली में हुई. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्षी सांसदों ने निर्वाचन आयोग की ओर शांतिपूर्ण मार्च निकाला था.
9 घंटे का ड्रामा: पुलिस ने जब मार्च को रास्ते में रोका, तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में ही ज़मीन पर धरने पर बैठ गए.
हिरासत में लिए गए दिग्गज: करीब नौ घंटे के लंबे गतिरोध के बाद दिल्ली पुलिस ने राहुल, प्रियंका और अन्य नेताओं को हिरासत में ले लिया.
देशभर में आक्रोश: जैसे ही इस कार्रवाई की खबर भोपाल पहुंची, मध्य प्रदेश कांग्रेस के नेता और कार्यकर्ता तुरंत सड़कों पर उतर आए.
राहुल की रिहाई के बाद खत्म हुआ धरना, अब प्रदेशभर में 'आर-पार'
भोपाल में CEO दफ्तर के बाहर कांग्रेस नेताओं का यह हाई-वोल्टेज धरना देर रात तक चलता रहा. यह धरना तब समाप्त हुआ, जब दिल्ली से खबर आई कि पुलिस ने राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को रिहा कर दिया है.
हालांकि, कांग्रेस का यह आंदोलन यहीं खत्म नहीं हो रहा है.
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने इस विरोध को जन-आंदोलन में बदलने का ऐलान किया है.बुधवार को राज्यव्यापी प्रदर्शन: राज्य के सभी जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर उग्र प्रदर्शन किए जा रहे हैं. कांग्रेस कार्यकर्ता मुख्य निर्वाचन आयुक्त का पुतला जलाकर विरोध दर्ज करा रहे हैं.कांग्रेस नेतृत्व का साफ संदेश है कि जब तक संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बहाल नहीं हो जाती, तब तक सड़क से लेकर सदन तक यह संग्राम जारी रहेगा.
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