मध्य प्रदेश में एक दर्जन सीटों पर क्या BJP और कांग्रेस का खेल बिगाड़ेंगे बागी और निर्दलीय, जानें?

मध्य प्रदेश में चुनावी माहौल चरम पर है. विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प मोड पर पहुंच गया है और हर जगह बीजेपी और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी, जो या तो बागी हैं या पहले से ही चुनाव मैदान में डटे हुए हैं.

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एमपी तक

10 Nov 2023 (अपडेटेड: 10 Nov 2023, 03:14 PM)

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MP Elections 2023: मध्य प्रदेश में चुनावी माहौल चरम पर है. विधानसभा चुनाव बेहद दिलचस्प मोड पर पहुंच गया है और हर जगह बीजेपी और कांग्रेस के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी, जो या तो बागी हैं या पहले से ही चुनाव मैदान में डटे हुए हैं. वह अपनी ही पार्टियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं. बता दें कि चुनाव में आखिरी मौके तक दलबदल का सिलसिला जारी रहा, जिसका खामियाजा अब कांग्रेस और बीजेपी को ही सबसे ज्यादा उठाना पड़ेगा. क्योंकि इन सीटों पर कांग्रेस और बीजेपी के प्रत्याशियों को यही बागी ही चुनौती देते दिख रहे हैं.

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मध्य प्रदेश की ऐसी कई सीटें हैं, जहां पर निर्दलीय सत्ताधारी दल भाजपा और कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकते हैं. निर्दलीय प्रत्याशी लगातार अपने क्षेत्र में सक्रिय रूप से प्रचार अभियान में जुटे हुए हैं. ऐसी करीब एक दर्जन सीटें हैं, जहां पर निर्दलीय प्रत्याशी पूरी ताकत से चुनाव मैदान में हैं. बता दें कि मध्य प्रदेश में 17 नवंबर को मतदान है और तीन दिसंबर को चुनाव के नतीजे घोषित किए जाएंगे.

जब टिकट नहीं मिला तो बागी हो गए नेता

चुनावी रण में इस बार भी कुछ ऐसे निर्दलीय प्रत्याशी ताल ठोक रहे हैं, जो भाजपा-कांग्रेस का खेल बिगाड़ भी सकते हैं. इनमें अधिकतर नेता वही हैं, जिन्होंने भाजपा और कांग्रेस से टिकट न मिलने से नाराज होकर अपनी अलग राह पकड़ ली है. पिछले चुनाव की तुलना में इस बार इनकी संख्या कुछ ज्यादा है. इनमें कुछ तो पूर्व सांसद और विधायक भी हैं. दरअसल, इन उम्मीदवारों का जातीय और स्थानीय स्तर पर मजबूत आधार है.

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कहां-कहां निर्दलीय बने हैं खतरा

प्रदेश में एक दर्जन सीटें ऐसी हैं, जहां निर्दलीय भाजपा और कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरे हैं. महू विधानसभा सीट से अंतरसिंह दरबार निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं. कांग्रेस विधायक रह चुके हैं, लेकिन टिकट न मिलने से पहले रोए, नाराज हुए और आखिर में चुनाव मैदान में उतर गए हैं. इसी तरह आलोट से प्रेमचंद गुड्डू, गोटेगांव से शेखर चौधरी, सिवनी मालवा से ओम रघुवंशी, होशंगाबाद से भगवती चौरे, धार से कुलदीप सिंह बुंदेला, मल्हारगढ़ से श्यामलाल जोकचंद, बड़नगर से राजेंद्र सिंह सोलंकी, भोपाल (उत्तर) से नासिर इस्लाम और आमिर अकील भी निर्दलीय ताल ठोक रहे हैं. ऐसा नहीं है कि कांग्रेस ने इन्हें मनाने की कोशिश नहीं की, लेकिन वह नहीं माने.

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कांग्रेस की तुलना में देखें तो भाजपा की स्थिति मायने में थाेड़ी बेहतर कही जा सकती है. हालांकि मैहर से नारायण त्रिपाठी, सीधी से केदारनाथ शुक्ल और बुरहानपुर से हर्षवर्धन सिंह चौहान ऐसे नेता हैं, जो निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं और बीजेपी का खेल बिगाड़ने की ताकत रखते हैं. इसमें कई प्रत्याशी ऐसे हैं, जो पार्टी से टिकट नहीं मिला तो बागी हो गए और दूसरे दलों से चुनाव मैदान में अपनी ही पार्टी के खिलाफ चुनौती बन गए हैं.

कांग्रेस-बीजेपी ने निर्दलीयों को दिया टिकट

पिछले चुनाव की बात करें तो चार निर्दलीय चुनाव जीते थे. इनमें से प्रदीप जायसवाल और विक्रम सिंह राणा इस बार भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं. वहीं, सुरेंद्र सिंह शेरा और केदार डाबर कांग्रेस के प्रत्याशी हैं. इसके पहले 2013 में दिनेश राय मुनमुन, सुदेश राय और कल सिंह भाबर निर्दलीय चुनाव जीते थे. इस बार तीनों अब भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं.

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