मध्य प्रदेश के रीवा जिले से प्रशासन की सख्ती का एक बड़ा वीडियो सामने आया है. जनसुनवाई के दौरान कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी अपने रौद्र रूप में नजर आए. उन्होंने लापरवाही बरतने पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार को जमकर फटकार लगाई. कलेक्टर इतने नाराज थे कि उन्होंने अधिकारियों से यहां तक कह दिया कि अगर वे सरकारी संपत्ति की रक्षा नहीं कर सकते और जनता का काम नहीं कर सकते, तो उन्हें अपनी कुर्सी छोड़ देनी चाहिए. यह पूरी घटना सरकारी हैंडपंप पर एक दबंग परिवार द्वारा कब्जा किए जाने की शिकायत के बाद हुई.
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सरकारी हैंडपंप पर दबंगों का कब्जा और अधिकारियों की लापरवाही
पूरा मामला हुजूर तहसील के गोविंदगढ़ थाना क्षेत्र के गढ़वा गांव का है. यहां एक शासकीय हैंडपंप पर गांव के ही एक रसूखदार परिवार ने गेट लगाकर उसे निजी संपत्ति बना लिया था. इस वजह से गांव के बाकी लोग पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए तरस रहे थे. पीड़ित फरियादी रामशिरोमणि मिश्रा ने बताया कि उन्होंने इसकी शिकायत कई बार स्थानीय अधिकारियों से की, लेकिन बार-बार चक्कर लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई. जनसुनवाई में जब यह मामला कलेक्टर के सामने आया, तो उन्होंने पाया कि अधिकारी इस पर महीनों से कुंडली मारकर बैठे थे.
कलेक्टर ने सरेआम लगाई क्लास, दी पद से हटाने की चेतावनी
शिकायत सुनते ही कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी का पारा चढ़ गया. उन्होंने मौके पर मौजूद तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सबके सामने खड़ा किया और जमकर लताड़ लगाई. कलेक्टर ने कड़े लहजे में पूछा, 'क्यों तहसीलदार हो आप? समाज के लोग परेशान हैं और आप स्टे दिलवा रहे हैं.' उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर आज शाम तक हैंडपंप से अतिक्रमण नहीं हटा, तो वे उन्हें पद से अटैच कर देंगे और उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे. कलेक्टर ने दो-टूक कहा कि सरकार की संपत्ति पर किसी का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
जनसुनवाई में उमड़ी भीड़
कलेक्टर ने बताया कि आज की जनसुनवाई में लगभग 250 आवेदन प्राप्त हुए. इनमें से अधिकांश मामले राजस्व विभाग जैसे नामांतरण, बंटवारा, रिकॉर्ड सुधार और पुराने आदेशों के पालन से संबंधित थे. इसके अलावा कुछ शिकायतें निजी कंपनियों द्वारा कर्मचारियों को नौकरी से निकाले जाने, श्रम विभाग और नगरीय निकायों से भी जुड़ी थीं. शिक्षा विभाग में अनुकंपा नियुक्ति और राशन कार्ड से जुड़ी समस्याओं को लेकर भी लोग पहुंचे थे. कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को इन शिकायतों का त्वरित निराकरण करने के निर्देश दिए हैं.
कलेक्टर की सख्ती का असर
कलेक्टर के सख्त तेवरों और अल्टीमेटम का असर तुरंत देखने को मिला. उनके आदेश के बाद राजस्व विभाग की टीम तत्काल हरकत में आई और भारी पुलिस बल के साथ गांव पहुंची. कुछ ही घंटों के भीतर दबंगों द्वारा हैंडपंप के चारों ओर लगाया गया गेट हटा दिया गया और उसे अतिक्रमण मुक्त करा लिया गया. अब यह हैंडपंप दोबारा गांव के आम लोगों के लिए चालू हो गया है, जिससे ग्रामीणों को बड़ी राहत मिली है. कलेक्टर की इस कार्रवाई ने जिले के अन्य लापरवाह अधिकारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश जारी किया है.
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