MP Election 2023: दिल्ली में राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की मौजूदगी में हुई मप्र कांग्रेस की बैठक में कमलनाथ की सीएम उम्मीदवारी को लेकर सिर फुटव्वल शुरू हो गई है. यह आरोप हैं मध्यप्रदेश बीजेपी के. दरअसल वे नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर रहे हैं, जिसमें डॉ. गोविंद सिंह बता रहे हैं कि कांग्रेस के अंदर चुनाव से पहले सीएम उम्मीदवार तय करने की कोई परंपरा नहीं है. कांग्रेस एक लोकतांत्रिक पार्टी है और चुनाव परिणाम सामने आने के बाद ही विधायक दल की बैठक में मुख्यमंत्री चुना जाता है.
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नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह के इस बयान के आधार पर बीजेपी आरोप लगा रही है कि मप्र कांग्रेस के नेताओं में कमलनाथ को सीएम बनाने को लेकर एक राय नहीं है. पहले अरुण यादव और अब नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह भी कमलनाथ के सीएम फेस के सवाल पर उनका समर्थन करते नजर नहीं आ रहे हैं. राहुल गांधी की बैठक के बाद डॉ. गोविंद सिंह का बयान सामने आया कि चुनाव परिणाम आने के बाद चुने हुए विधायक ही मुख्यमंत्री को चुनेंगे.
जाहिर है कि कमलनाथ को मुख्यमंत्री पद का फेस बनाने को लेकर कांग्रेस के अंदर कलह मची है. इस कलह पर मोहर खुद राहुल गांधी ने तब लगा दी जब दिल्ली में बैठक के बाद राहुल गांधी मीडिया के सामने आए और जब उनसे कमलनाथ को सीएम उम्मीदवार बनाए जाने का सवाल किया तो वे चुप्पी साध गए और जवाब में बोले कि ‘भैया, मध्यप्रदेश में कांग्रेस की 150 सीटें आ रही हैं’.
दिग्विजय सिंह भी बातों में घुमा गए
दिग्विजय सिंह से जब मीडियाकर्मियों ने यही सवाल किया तो वे भी इस बार स्पष्ट नहीं बोले कि कमलनाथ ही मुख्यमंत्री पद के प्रमुख उम्मीदवार होंगे. इस बार दिग्विजय सिंह ने कहा कि जन भावना है कि पीसीसी चीफ कमलनाथ मुख्यमंत्री बनें. 99 फीसदी कांग्रेस कार्यकर्ता कमलनाथ के नेतृत्व में चुनाव लड़ने को तैयार हैं. यदि बहुमत आता है तो कमलनाथ मुख्यमंत्री बनें, ऐसी जन भावना है. जबकि यही दिग्विजय सिंह पहले मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में दौरा करने के दौरान स्पष्ट बोल रहे थे कि कमलनाथ ही कांग्रेस के सीएम फेस होंगे.
नेता प्रतिपक्ष भी पहले कमलनाथ को ही बताते थे सीएम फेस
जिन नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह का वीडियो सोशल मीडिया पर बीजेपी वायरल करा रही है, वही नेता प्रतिपक्ष कुछ समय पहले तक यही बोलते थे कि कांग्रेस का सीएम फेस कमलनाथ ही हैं और चुनाव जीतने पर कमलनाथ ही मुख्यमंत्री बनेंगे. लेकिन अब इनके भी तेवर बदले-बदले नजर आ रहे हैं और बोल रहे हैं कि चुनाव से पूर्व सीएम फेस तय करना कांग्रेस की परंपरा नहीं है और चुनाव जीतने के बाद विधायक दल की बैठक में सीएम चुना जाएगा.
सबसे पहले अरुण यादव ने किया था विरोध
कमलनाथ को सीएम फेस बनाने को लेकर सबसे पहला विरोध पूर्व पीसीसी चीफ और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण यादव ने ही किया था. उन्होंने MP Tak के कार्यक्रम बैठकी में साफ बोला था कि कांग्रेस में चुनाव से पहले कोई सीएम फेस नहीं होता है और कमलनाथ अभी से कांग्रेस के सीएम फेस नहीं है. यह बात उन्होंने 4 फरवरी को भोपाल में MP Tak के कार्यक्रम में बोली थी, जिसके बाद से ही कमलनाथ के सीएम फेस को लेकर कांग्रेस के अंदर और बाहर सवाल खड़े होने लगे.
बीजेपी को मिला राजनीतिक मौका
कांग्रेस पार्टी के अंदर सीएम फेस पर सवाल खड़े होने की जानकारी जैसे ही बाहर आई है, बीजेपी ने इसे एक बड़े राजनीतिक मौके की तरह लपका है. बुधवार को ही गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने बयान दिया कि राहुल गांधी की बैठक में बंद कमरे में जो कुछ हुआ है, उसे खुद नेता प्रतिपक्ष डॉ. गोविंद सिंह ने सार्वजनिक कर दिया है.
बीजेपी प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने ट्वीट कर लिखा है कि ‘दिल्ली बैठक से लौटे नेता प्रतिपक्ष डॉ.गोविंद सिंह ने कमलनाथ जी के उन सलाहकारों के मुँह पर करारा तमाचा जड़ा है, जो बैठक के बाद इस झूठ को ज़ोर-शोर से प्रचारित कर रहे थे कि बैठक में कमलनाथ जी के चेहरे पर सर्वसम्मति बन गयी है…. उन्होंने भाजपा के इस खुलासे पर भी मुहर लगा दी है कि बैठक में असंतुष्टों ने श्री नाथ का जमकर विरोध किया है , जमकर आपसी सिर फट्टुवल हुई है… नेता प्रतिपक्ष ने यह बयान देकर बता दिया है कि वे भी अन्य 8 की तरह कांग्रेस के चेहरे के प्रबल दावेदार है’..
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